कोयंबटूर में फर्जी CBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 वर्षीय कारोबारी से ₹20 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया।

साइलेंट डिजिटल ठगी में अधिवक्ता से ₹2 लाख उड़ाए: नेटवर्क फेल का फायदा उठाकर साइबर फ्रॉड

Team The420
4 Min Read

कानपुर के सरसौल क्षेत्र में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें एक अधिवक्ता के बैंक खाते से कथित रूप से ₹2 लाख की अवैध निकासी कर ली गई। पीड़ित ने इस संबंध में महाराजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने साइबर अपराध का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित अरविंद कुमार, जो महुआगांव के निवासी हैं, ने बताया कि उनका बैंक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा, सरसौल शाखा में है। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल को अचानक उनके मोबाइल में नेटवर्क की समस्या आने लगी, जिसके कारण उनका फोन पूरी तरह काम करना बंद कर गया।

शिकायत के अनुसार, यह नेटवर्क समस्या कई दिनों तक बनी रही, जिससे वह अपने मोबाइल सेवाओं का उपयोग नहीं कर सके। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी खराबी माना, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य न होने पर उन्हें संदेह हुआ।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

1 मई को जब वह बैंक शाखा पहुंचे और अपने खाते की जानकारी ली, तो उन्हें बड़ा झटका लगा। जांच में पता चला कि उनके खाते से पहले ही ₹2 लाख की राशि बिना किसी अनुमति के निकाल ली गई थी।

इस खुलासे के बाद अधिवक्ता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और महाराजपुर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर फ्रॉड के तहत केस दर्ज कर लिया है।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों ने मोबाइल नेटवर्क में आई समस्या का फायदा उठाकर खाते की जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई हो सकती है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है, जिनमें फिशिंग, सिम स्वैप फ्रॉड और डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी शामिल हैं।

अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब तकनीकी कमजोरियों और सोशल इंजीनियरिंग का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं, खासकर तब जब नेटवर्क या सेवा में बाधा होती है और उपभोक्ता तुरंत अपने खातों की निगरानी नहीं कर पाते।

पुलिस के अनुसार, साइबर क्राइम यूनिट इस मामले की गहन जांच कर रही है। बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल लॉग्स और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह ठगी कैसे हुई और पैसे किस खाते में ट्रांसफर किए गए।

जांच एजेंसियां संबंधित बैंक खातों को ट्रैक कर धन की रिकवरी की कोशिश भी कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह की अन्य घटनाएं भी इसी पैटर्न से जुड़ी हुई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड अब अधिक जटिल और तकनीकी हो चुके हैं, जहां अपराधी अस्थायी नेटवर्क समस्याओं का फायदा उठाकर बिना तुरंत पता चले पैसे निकाल लेते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, बैंकिंग अलर्ट या मोबाइल नेटवर्क समस्या की स्थिति में तुरंत अपने खाते की जांच करें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत दें।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट होगा कि यह ठगी किस तरीके से की गई और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों की पहचान होते ही उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article