कानपुर। बैंकिंग और GST फ्रॉड के अब तक के सबसे बड़े मामलों में से एक में महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी और उसके गिरोह के खिलाफ बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने करीब 400 कारोबारियों और फर्मों से जुड़े बैंक खातों के जरिए लगभग ₹3,200 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन कराया।
पुलिस ने महफूज अली को गिरफ्तार कर लिया है, जो लंबे समय से दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल में छिपकर रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने अपने गिरोह के सात अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी दी है।
जांच के अनुसार, महफूज अली और उसके साथियों ने 12 अलग-अलग बैंकों में 68 खाते खोले थे, जिनमें ढाई साल के भीतर लगभग ₹1,600 करोड़ का ट्रांजैक्शन दर्ज हुआ था। बाद में आयकर विभाग की विस्तृत जांच में यह आंकड़ा बढ़कर ₹3,200 करोड़ तक पहुंच गया।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क टेनरी, स्लॉटर हाउस और स्क्रैप कारोबार से जुड़ी वैध और अवैध रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर कैश में बदलने का काम करता था। इस पूरे खेल में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की भी पुष्टि हुई है।
जांच में सामने आया कि महफूज अली ने गरीब और आम लोगों—जैसे रिक्शा चालक, ड्राइवर, नौकर और सब्जी विक्रेताओं—को सरकारी योजनाओं और बीमा का लालच देकर फर्म मालिक बना दिया। उनके आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी करंट अकाउंट खोले गए और इनके जरिए बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन किए गए।
पुलिस के अनुसार, कई फर्जी फर्में भी बनाई गईं, जिनमें आरती इंटरप्राइजेज, राजा इंटरप्राइजेज, अफीसा इंटरप्राइजेज और रवि इंटरप्राइजेज जैसे नाम शामिल हैं। इन फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और GST का अवैध लाभ बड़े व्यापारियों तक पहुंचाया गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल युवकों को 3 से 5 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। एक दिन में ही खातों में ₹4 से ₹6 करोड़ तक का लेनदेन किया जाता था ताकि निगरानी से बचा जा सके।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, महफूज अली के खिलाफ पहले से छह एफआईआर दर्ज हैं—चार जाजमऊ और दो चकेरी थाने में। उस पर लोन और सरकारी योजनाओं के नाम पर दस्तावेज जुटाकर फर्जी खाते खुलवाने और फर्जी सिम के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग चलाने का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि महफूज अली ने अपने नेटवर्क को कई राज्यों—दिल्ली, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल—तक फैला रखा था। वह कई बार कोलकाता और नादिया जिले में भी छिपा रहा, जहां उसकी रिश्तेदारी बताई जा रही है।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, महफूज मोबाइल का उपयोग नहीं करता था और केवल व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए संपर्क में रहता था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था। तकनीकी सर्विलांस के जरिए आखिरकार उसे गिरफ्तार किया गया।
डीसीपी पूर्वी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य बड़े कारोबारियों को फर्जी GST और ITC लाभ दिलाना था। इसके बदले में यह गिरोह करोड़ों रुपये का कमीशन कमाता था और फर्जी कंपनियों के जरिए रकम को वैध बनाने की कोशिश करता था।
इस पूरे मामले पर साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे संगठित वित्तीय अपराधों में “डिजिटल पेमेंट सिस्टम, फर्जी KYC और म्यूल अकाउंट्स का नेटवर्क” मुख्य हथियार बन चुका है। उनके अनुसार, “बिना मजबूत रियल-टाइम KYC और बैंकिंग एनालिटिक्स के ऐसे बड़े फ्रॉड को रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण है।”
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संपत्तियों की गहन जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान जल्द सामने आएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल बैंकिंग फ्रॉड नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध नेटवर्क है, जिसका दायरा कई राज्यों और कारोबार क्षेत्रों तक फैला हुआ है। जांच अभी जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
