बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा धोखाधड़ी मामला सामने आया है, जहां जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा मिलने के बाद एक सेवानिवृत्त डाक कर्मचारी को कथित तौर पर फर्जी बैनामे के जरिए ₹1.47 करोड़ की ठगी का शिकार बना लिया गया। मामले में प्रॉपर्टी डीलर समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि संगठित तरीके से फर्जी विक्रेताओं और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जमीन का सौदा कराया गया और बाद में पूरा मामला फर्जी निकला।
पीड़ित कंछी सिंह मूल रूप से दिल्ली के कालकाजी मंदिर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं और वर्तमान में रबूपुरा थाना क्षेत्र के म्याना गांव में रह रहे हैं। शिकायत के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट परियोजना के तहत उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसके बदले उन्हें मुआवजा राशि प्राप्त हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपने भाइयों हरप्रसाद और रनवीर के साथ मिलकर दूसरी जगह कृषि भूमि खरीदने की योजना बनाई थी ताकि मुआवजे की रकम को दोबारा निवेश किया जा सके।
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इसी दौरान उनकी मुलाकात झाझर क्षेत्र में सक्रिय एक प्रॉपर्टी डीलर प्रवेश उर्फ बंटी भाटी से हुई। आरोप है कि आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर जहांगीरपुर थाना क्षेत्र के गांव कपना में एक जमीन दिखाई और दावा किया कि वह जमीन वैध और विवादमुक्त है। पीड़ित पक्ष को भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेज, विक्रेता और राजस्व रिकॉर्ड भी दिखाए गए, जिससे सौदा वास्तविक प्रतीत हुआ।
शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने करीब ₹1 करोड़ 46 लाख 76 हजार में जमीन का बैनामा करा दिया। बाद में जब दस्तावेजों की गहराई से जांच कराई गई तो सामने आया कि जमीन के वास्तविक मालिक और बैनामा कराने वाले लोगों में अंतर था। आरोप है कि फर्जी विक्रेताओं और जाली दस्तावेजों के माध्यम से यह पूरी डील कराई गई और रकम हड़प ली गई। मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित पक्ष ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
मामले को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर रबूपुरा कोतवाली में सात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है उनमें प्रवेश उर्फ बंटी भाटी, पंकज राघव, गोली उर्फ कुलदीप, बसंत, परवीन, राजू और प्रमोद के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब जमीन के मूल रिकॉर्ड, बैनामे में इस्तेमाल दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की पड़ताल कर रही हैं।
भूमि और संपत्ति मामलों के जानकारों का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना के बाद आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी का फायदा उठाकर कई फर्जी प्रॉपर्टी नेटवर्क सक्रिय हो गए हैं, जो मुआवजा पाने वाले लोगों को आसान निवेश और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में नकली विक्रेता, फर्जी खतौनी, जाली पहचान पत्र और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है।
रियल एस्टेट मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन खरीदने से पहले राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी, मालिकाना हक और बैनामे से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच कराना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है जहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण जमीन की कीमतों में अचानक उछाल आया हो।
फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े संगठित भूमि धोखाधड़ी गिरोह से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी तरह के कई अन्य सौदों में भी फर्जी दस्तावेजों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में जमीन खरीदने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है और प्रशासन ने लोगों से बिना सत्यापन के संपत्ति खरीदने से बचने की अपील की है।
