कानपुर में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 45 स्वयं सहायता समूहों पर ₹40 लाख का फंड लेने के बाद गायब होने का आरोप।

सेक्स पावर इंजेक्शन से करोड़ों का खेल: जयपुर के निजी अस्पताल पर गबन और अवैध दवा कारोबार के आरोप

Team The420
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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक निजी अस्पताल से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं, दवा नियमन और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोपालपुरा बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर सेक्स पावर बढ़ाने वाले इंजेक्शन की अवैध बिक्री, करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन और करीब ₹80 से ₹90 लाख के गबन का मामला उजागर हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने अस्पताल में मेडिकल असिस्टेंट के रूप में कार्यरत मनीष कुमार सोनी को गिरफ्तार किया है। मामले में वित्तीय धोखाधड़ी के साथ-साथ बिना अनुमति दवा कारोबार के आरोप भी सामने आने के बाद कई एजेंसियां जांच में जुट गई हैं।

मामले की शुरुआत अस्पताल प्रशासन की शिकायत से हुई। अस्पताल के निदेशक की ओर से साइबर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि मेडिकल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत आरोपी ने दवाओं की बिक्री से मिलने वाली रकम अस्पताल के अधिकृत बैंक खाते में जमा कराने के बजाय अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर करवा ली। प्रारंभिक जांच में लाखों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

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जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तथाकथित “ट्राइमिक्स” इंजेक्शन को लेकर हुआ। अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से अस्पताल से सेक्स पावर बढ़ाने के नाम पर यह इंजेक्शन कथित तौर पर अवैध रूप से बेचा जा रहा था। जांच में सामने आया कि तीन अलग-अलग दवाओं के मिश्रण से तैयार किए गए इंजेक्शन को “ट्राइमिक्स” नाम दिया गया और इसे ऊंची कीमतों पर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। यह सप्लाई केवल राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए विदेशों तक भी भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कथित “ट्राइमिक्स” इंजेक्शन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से किसी प्रकार की मंजूरी प्राप्त नहीं थी। इसके बावजूद लंबे समय तक इसकी बिक्री जारी रहने के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि बिना नियामकीय अनुमति के किसी दवा या इंजेक्शन की बिक्री सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

मामले में “ऑह मैन फार्मेसी” नाम का भी जिक्र सामने आया है। आरोप है कि इसी नाम से इंजेक्शन के बिल काटे जाते थे, जबकि जांच में इस नाम की कोई अधिकृत या पंजीकृत फार्मेसी फर्म नहीं मिली। अधिकारियों को आशंका है कि बिना लाइसेंस के मेडिकल बिक्री का यह नेटवर्क लंबे समय से संचालित हो रहा था। डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और ऑनलाइन ऑर्डर की जानकारी अब जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सबूत बनती जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, जब अस्पताल प्रशासन को संभावित कार्रवाई का अंदेशा हुआ तो कथित तौर पर अस्पताल परिसर से इंजेक्शन का स्टॉक और उससे जुड़े कई रिकॉर्ड हटा दिए गए। जांच एजेंसियों को संदेह है कि बिक्री रजिस्टर, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और सप्लाई रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा गायब किया गया है। हालांकि, बैंकिंग डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन हिस्ट्री के आधार पर वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल जारी है।

जानकारी के अनुसार, गुजरात ड्रग्स डिपार्टमेंट से मिली सूचना के बाद राजस्थान ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया। 9 अप्रैल 2026 को ड्रग्स विभाग की टीम ने अस्पताल में छापा भी मारा था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि बिना अनुमोदन वाले इंजेक्शन की बिक्री और सप्लाई लंबे समय से की जा रही थी। मामले में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल को भी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन नेटवर्क का बढ़ता उपयोग नई तरह की वित्तीय और मेडिकल अनियमितताओं को जन्म दे रहा है। उन्होंने कहा,

“जब अस्पतालों में दवा बिक्री, डिजिटल पेमेंट और सप्लाई सिस्टम की निगरानी कमजोर होती है, तब ऐसे नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। मेडिकल संस्थानों में नियमित ऑडिट, डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त नियामकीय निगरानी बेहद जरूरी है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल गबन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध दवा वितरण, बिना लाइसेंस मेडिकल कारोबार, वित्तीय धोखाधड़ी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर कानूनी पहलुओं तक पहुंच सकता है। फिलहाल पुलिस, ड्रग्स कंट्रोल विभाग और अन्य एजेंसियां अस्पताल प्रशासन, वित्तीय रिकॉर्ड और संभावित सप्लाई नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।

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