नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती क्षमताओं ने अब वैश्विक वित्तीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अत्याधुनिक AI मॉडल “Claude Mythos” को लेकर गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में ऐसे सिस्टम वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क, पेमेंट सिस्टम और डिजिटल वित्तीय ढांचे के लिए बड़ा साइबर खतरा बन सकते हैं। IMF के मुताबिक, AI आधारित साइबर टूल्स इतने उन्नत हो चुके हैं कि वे इंसानों से छूट जाने वाली कमजोरियों को भी कुछ ही मिनटों में खोज सकते हैं और उनका दुरुपयोग कर सकते हैं।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दुनिया भर की सरकारें AI मॉडल्स के अनियंत्रित इस्तेमाल को लेकर सतर्क हो चुकी हैं। अमेरिका, भारत और यूरोपीय देशों ने पहले ही उन्नत साइबर-AI सिस्टम्स की निगरानी और नियंत्रण को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, Anthropic द्वारा विकसित Claude Mythos नाम का AI मॉडल इतना सक्षम बताया जा रहा है कि वह हजारों सॉफ्टवेयर कमजोरियों को स्वतः पहचान सकता है और साइबर हमलों के लिए उनका विश्लेषण भी कर सकता है।
IMF ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऐसे AI मॉडल साइबर अपराधियों के लिए “फोर्स मल्टीप्लायर” साबित हो सकते हैं। पहले जिन कमजोरियों को खोजने में साइबर हैकर्स को महीनों लग जाते थे, अब वही काम AI कुछ घंटों या मिनटों में कर सकता है। इससे बैंकिंग नेटवर्क, डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी वित्तीय प्रणालियों पर बड़े पैमाने पर समन्वित हमलों का खतरा बढ़ गया है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि किसी प्रमुख सॉफ्टवेयर या नेटवर्क में एक कमजोरी मिलती है, तो AI उसी तरह के दूसरे हजारों सिस्टम्स में भी उसी खामी का पता लगा सकता है। इससे “कोरिलेटेड फेल्योर” यानी एक साथ कई संस्थानों के सिस्टम प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन, एटीएम सेवाएं, डिजिटल वॉलेट और अंतरराष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क तक बाधित हो सकते हैं।
IMF ने यह भी कहा कि साइबर हमलों में अब “मशीन स्पीड” का दौर शुरू हो चुका है। AI सिस्टम इतने तेज़ हैं कि कई बार सुरक्षा एजेंसियां और कंपनियां कमजोरियों को ठीक करने से पहले ही हमलावर उनका फायदा उठा सकते हैं। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक साइबर सुरक्षा ढांचे AI आधारित हमलों के सामने कमजोर पड़ सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित साइबर हमले केवल वित्तीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे। ऊर्जा, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सार्वजनिक सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी ऐसे हमलों का असर दिखाई दे सकता है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
साइबर मामलों पर टिप्पणी करते हुए “Future Crime Research Foundation” से जुड़े एक साइबर रिसर्चर ने कहा कि AI अब केवल ऑटोमेशन का टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह साइबर युद्ध की नई परत बनता जा रहा है। उनके अनुसार, आने वाले समय में AI आधारित सुरक्षा और AI आधारित हमलों के बीच सीधी डिजिटल प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
वहीं, प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि भविष्य के साइबर अपराध पारंपरिक हैकिंग से कहीं अधिक खतरनाक होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि AI आधारित सिस्टम सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी पहचान, डीपफेक और स्वचालित साइबर हमलों को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा सकते हैं। उनके मुताबिक, यदि वैश्विक स्तर पर संयुक्त साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं किया गया तो वित्तीय संस्थानों के लिए बड़े संकट खड़े हो सकते हैं।
IMF ने अपनी रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष जोर दिया है। संस्था का कहना है कि विकसित और विकासशील देशों के बीच साइबर सुरक्षा तकनीक, खतरे से जुड़ी जानकारी और AI सुरक्षा उपायों को साझा करना जरूरी होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संसाधनों की कमी वाले देशों के सिस्टम सबसे पहले निशाने पर आ सकते हैं, जिससे वैश्विक वित्तीय नेटवर्क की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल Claude Mythos को सीमित कंपनियों और संस्थानों तक ही रखा गया है, लेकिन इसकी क्षमताओं को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है। कई देशों ने इस तकनीक तक नियंत्रित पहुंच की मांग की है ताकि वे अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकें।
