नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइटों के जरिए हो रही साइबर ठगी को लेकर गृह मंत्रालय की साइबर विंग Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने नागरिकों को नकली वेबसाइट, फर्जी पेमेंट लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए हो रही धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह दी है। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए I4C ने देशव्यापी एडवाइजरी जारी कर ऑनलाइन खरीदारी करने वालों के लिए कई जरूरी दिशा-निर्देश भी साझा किए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, देश में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार और भारी छूट वाले ऑफर्स के कारण साइबर अपराधियों को लोगों को निशाना बनाने का नया अवसर मिल रहा है। ठग अब केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नकली वेबसाइट, फर्जी सोशल मीडिया विज्ञापन, धोखाधड़ी वाले डिलीवरी एजेंट, नकली रिफंड स्कैम और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खातों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
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जांच एजेंसियों के मुताबिक, साइबर अपराधी ऐसी वेबसाइट तैयार कर रहे हैं जो देखने में बिल्कुल लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं। इन वेबसाइटों पर महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, मोबाइल फोन और ब्रांडेड उत्पाद बेहद कम कीमत पर दिखाए जाते हैं, ताकि ग्राहक जल्दी आकर्षित हो जाएं। कई मामलों में भुगतान होने के बाद या तो सामान भेजा ही नहीं जाता या फिर ग्राहकों को खाली डिब्बे प्राप्त होते हैं। कुछ फर्जी वेबसाइटें कुछ दिनों के भीतर ही गायब हो जाती हैं, जिससे पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज कराना भी मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों ने सोशल Media प्लेटफॉर्म Instagram, Facebook और YouTube पर चल रहे भ्रामक विज्ञापनों को लेकर भी चिंता जताई है। “90% Discount”, “Stock Clearance Sale” और “Government Auction” जैसे आकर्षक ऑफर दिखाकर लोगों को नकली पोर्टल पर भेजा जाता है। जैसे ही उपयोगकर्ता इन विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं, उन्हें ऐसी वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट किया जाता है जहां उनकी बैंकिंग और भुगतान संबंधी जानकारी चोरी की जा सकती है।
I4C ने अपनी एडवाइजरी में लोगों से कहा है कि किसी भी वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि जरूर करें। एजेंसी ने सलाह दी है कि केवल अधिकृत या प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अथवा ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट से ही खरीदारी की जाए। साथ ही URL को ध्यान से जांचने, वेबसाइट पर “HTTPS” और पैडलॉक चिन्ह की मौजूदगी सुनिश्चित करने और गलत स्पेलिंग वाले डोमेन से बचने को कहा गया है।
एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी WhatsApp, SMS और ईमेल के जरिए नकली पेमेंट लिंक भेज रहे हैं। ये लिंक देखने में असली वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी कार्ड डिटेल, UPI PIN या बैंकिंग जानकारी दर्ज करता है, उसकी जानकारी सीधे अपराधियों तक पहुंच जाती है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी पूरी जांच करें।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब “सोशल इंजीनियरिंग” तकनीक के जरिए लोगों को जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं। उनके मुताबिक, भारी छूट और सीमित समय वाले ऑफर लोगों की मानसिकता को प्रभावित करते हैं और इसी का फायदा ठग उठाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी असामान्य ऑफर पर तुरंत भरोसा करने के बजाय आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन करना जरूरी है।
Future Crime Research Foundation के एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, कई फर्जी वेबसाइट अब AI-आधारित डिजाइन और नकली ग्राहक समीक्षा का उपयोग कर रही हैं, जिससे आम उपयोगकर्ताओं के लिए असली और नकली प्लेटफॉर्म में अंतर करना कठिन हो गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान के दौरान टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल और अलग भुगतान कार्ड का उपयोग जोखिम को कम कर सकता है।
I4C ने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि किसी भी उत्पाद की डिलीवरी के समय अनबॉक्सिंग का वीडियो रिकॉर्ड करें, ताकि विवाद की स्थिति में सबूत उपलब्ध हो सके। साथ ही एजेंसी ने AnyDesk और TeamViewer जैसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स अनजान लोगों के कहने पर डाउनलोड न करने की चेतावनी दी है, क्योंकि इनके जरिए अपराधी मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक सीधी पहुंच हासिल कर सकते हैं।
गृह मंत्रालय की साइबर विंग ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें और परिवार के अन्य सदस्यों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाएं।
