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हैदराबाद में विला प्रोजेक्ट ठगी का भंडाफोड़: 40 से अधिक निवेशकों से ₹39 करोड़ से ज्यादा की वसूली, कई फर्मों पर केस दर्ज

Team The420
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हैदराबाद के पास पोचारम इलाके में प्रस्तावित विला प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। साइबराबाद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दो निजी रियल एस्टेट कंपनियों के निदेशकों और साझेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन कंपनियों ने 40 से अधिक निवेशकों से करीब ₹39 करोड़ से ज्यादा की रकम वसूलकर उन्हें ठगी का शिकार बनाया।

शिकायत के अनुसार, मियापुर निवासी आईटी कर्मचारी ओ. वेंकट कोटेश्वर राव और अन्य निवेशकों को जनवरी 2023 में RSR ग्रीनवे इंफ्रा की ओर से टेली-कॉलिंग के जरिए “Rocketry” नाम के विला प्रोजेक्ट में निवेश के लिए संपर्क किया गया। यह प्रोजेक्ट 13 एकड़ 22 गुन्टा जमीन पर विकसित किए जाने का दावा किया गया था, साथ ही HMDA और RERA मंजूरी प्रक्रिया में होने की बात कही गई थी।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपनी पत्नी के साथ 100% अग्रिम भुगतान योजना के तहत ₹3,900 प्रति वर्ग फुट की दर से चार विला बुक किए और कुल ₹3.57 करोड़ का भुगतान किया। आरोप है कि कंपनी की ओर से विकास समझौते और बिक्री दस्तावेज दिखाकर निवेशकों को भरोसे में लिया गया।

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हालांकि पूरा भुगतान लेने के बावजूद न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही जरूरी सरकारी मंजूरियां हासिल की गईं। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता और संदेह की स्थिति पैदा हो गई।

जांच में सामने आया कि इस पूरे प्रोजेक्ट में कम से कम 42 निवेशक प्रभावित हुए हैं। इनमें से प्रत्येक ने ₹14 लाख से लेकर ₹1.45 करोड़ तक निवेश किया था। इस तरह कुल संदिग्ध धोखाधड़ी की राशि ₹39.57 करोड़ तक पहुंच गई है।

EOW अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में RSR ग्रीनवे इंफ्रा के निदेशक आर. श्रीकांत रेड्डी, उनकी पत्नी राजेश्वरी और सूर्योदय कंपनी के साझेदार स्वामी रेड्डी व रेड्डी शरधा के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि एक ही विला नंबर के लिए कई लोगों के साथ समझौते किए गए, जिससे डुप्लीकेट अलॉटमेंट और फर्जीवाड़े की आशंका मजबूत होती है।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और तेलंगाना प्रोटेक्शन ऑफ डिपॉजिटर्स इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल जांच जारी है और धन के प्रवाह (money trail) की बारीकी से जांच की जा रही है।

रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह की ठगी के मामले हाल के वर्षों में बढ़े हैं, खासकर उन परियोजनाओं में जहां प्री-लॉन्च ऑफर और जल्दी मंजूरी के दावे किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में टेलीमार्केटिंग और शुरुआती निवेशकों का भरोसा जुटाकर बड़ी रकम इकट्ठा की जाती है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बिना सत्यापित भूमि रिकॉर्ड, ओवरलैपिंग एग्रीमेंट और कमजोर एस्क्रो व्यवस्था के कारण रियल एस्टेट क्षेत्र निवेश धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील बना हुआ है।

मामले की जांच के दौरान बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और लोगों की शिकायतें सामने आ सकती हैं और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बड़े निवेश से पहले सभी मंजूरी, जमीन के दस्तावेज और डेवलपर की साख की पूरी जांच करें। साथ ही यह भी सलाह दी गई है कि बिना पंजीकृत समझौते और पूर्ण अग्रिम भुगतान से बचें।

फिलहाल यह मामला साइबराबाद क्षेत्र में जांच के अधीन है और जांच एजेंसियां पूरे वित्तीय नेटवर्क और संदिग्ध लेनदेन की कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं।

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