NSEL घोटाले से जुड़ी संपत्तियों की नीलामी में कथित अंडरवैल्यूएशन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

हैदराबाद में डिजिटल गोल्ड स्कैम का पर्दाफाश: रिटायर्ड व्यक्ति से फर्जी USDT निवेश में ₹56.8 लाख की ठगी

Team The420
4 Min Read

हैदराबाद। डिजिटल निवेश के नाम पर एक बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है, जिसमें वानस्थलीपुरम के 63 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति से करीब ₹56.8 लाख की ठगी कर ली गई। ठगों ने फर्जी “डिजिटल गोल्ड ट्रेडिंग” और क्रिप्टोकरेंसी (USDT) आधारित निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ित को लगातार बड़े निवेश के लिए फंसाया।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 7 अप्रैल को टेलीग्राम के एक ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां एक महिला ने खुद को “नंदिनी रेड्डी” बताते हुए संपर्क किया। उसने दावा किया कि वह डिजिटल गोल्ड और क्रिप्टो ट्रेडिंग की विशेषज्ञ है और इस प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से निश्चित और ऊंचा मुनाफा मिलता है। शुरुआती बातचीत और बार-बार दिए गए भरोसे के कारण पीड़ित को यह योजना वास्तविक लगी।

पीड़ित ने शुरुआत में ₹49,999 का निवेश किया, जिसे कथित रूप से USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर उसके ऑनलाइन अकाउंट में दिखाया गया। कुछ ही दिनों में प्लेटफॉर्म पर छोटे-छोटे मुनाफे दर्शाए जाने लगे, जिससे उसका भरोसा और मजबूत हो गया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगों ने उसे लगातार निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जांच में सामने आया है कि पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में कई ट्रांजैक्शन किए और कुल मिलाकर ₹56.84 लाख तक निवेश कर दिया। आरोपी लगातार उसके अकाउंट में बढ़ती हुई राशि और “फर्जी प्रॉफिट बैलेंस” दिखाते रहे, जिससे उसे यह लगा कि निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

हालांकि, जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने अचानक नई शर्तें जोड़ दीं। उनसे “7% एक्सचेंज फीस” और अन्य सर्विस चार्ज के नाम पर ₹25.52 लाख अतिरिक्त जमा करने की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया गया है और निकासी तभी संभव होगी जब अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।

लगातार पैसे मांगने और कोई भी राशि वापस न मिलने पर पीड़ित को शक हुआ। बाद में जब उसने पूरी प्रक्रिया की जांच की तो उसे एहसास हुआ कि वह एक संगठित साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुका है। इसके बाद उसने मलकाजगिरी साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन और बैंक खातों के माध्यम से पूरे पैसे के प्रवाह की जांच की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह किसी बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो सोशल मीडिया और फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग वेबसाइट्स के जरिए लोगों को निशाना बनाता है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे “डिजिटल गोल्ड” और क्रिप्टो स्कैम में ठग पहले छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा जीतते हैं, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश कराते हैं। बाद में निकासी के समय भारी शुल्क लगाकर या सिस्टम अपग्रेड का बहाना बनाकर पूरी प्रक्रिया रोक दी जाती है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इन ठगी मामलों में इसलिए किया जाता है क्योंकि इनके लेनदेन को ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है और पैसा कई देशों और वॉलेट्स के जरिए घुमाया जाता है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप में दिए गए निवेश ऑफर पर भरोसा न करें, खासकर जब उसमें “गारंटीड रिटर्न” या निश्चित मुनाफे का दावा किया जा रहा हो।

फिलहाल पुलिस तकनीकी सबूतों, सर्वर डेटा और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसियों को शक है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी हो सकते हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article