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साइबर केस में रिश्तेदारों को फंसाने की धमकी, फिर मांगी ₹9 लाख की रिश्वत: साइबर इंस्पेक्टर बथुला महेंदर ट्रैप में गिरफ्तार

Team The420
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हैदराबाद। साइबर अपराध की जांच करने वाली एजेंसी के एक अधिकारी पर ही रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगने से कानून-व्यवस्था तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) में तैनात साइबर इंस्पेक्टर बथुला महेंदर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कथित रिश्वत मांगने के आरोप में ट्रैप कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने एक साइबर धोखाधड़ी मामले में शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों और दोस्तों को आरोपी बनाने की धमकी देकर कुल ₹9 लाख की अवैध रकम मांगी थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार मामला एक चल रही साइबर फ्रॉड जांच से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता को पहले गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। आरोप है कि इसी मामले का फायदा उठाते हुए इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता पर दबाव बनाना शुरू किया और कहा कि यदि उसने पैसे नहीं दिए तो उसके परिवार के सदस्यों और करीबी परिचितों को भी मामले में शामिल कर लिया जाएगा।

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शिकायत के मुताबिक आरोपी अधिकारी ने कुल ₹9 लाख रिश्वत की मांग की थी। आरोप है कि इस रकम में से ₹5 लाख पहले ही विभिन्न किश्तों में वसूल किए जा चुके थे। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के पिता ने कथित रूप से ₹2 लाख दिए थे, जबकि शिकायतकर्ता ने स्वयं ₹3 लाख का भुगतान किया था। इसके बावजूद अधिकारी द्वारा शेष ₹4 लाख की मांग लगातार जारी रखी गई।

बताया गया है कि शिकायतकर्ता लंबे समय से इस आशंका में था कि उसके रिश्तेदारों और मित्रों को भी साइबर धोखाधड़ी मामले में फंसा दिया जाएगा। लगातार दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर उसने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क किया और पूरी घटना की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने आरोपों का प्रारंभिक सत्यापन किया। प्रथम दृष्टया मामला सही पाए जाने पर अधिकारियों ने ट्रैप की योजना बनाई। शिकायतकर्ता के सहयोग से कथित मांग की निगरानी की गई और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। इसके बाद एक सुनियोजित कार्रवाई के तहत आरोपी अधिकारी को पकड़ने की तैयारी की गई।

जांच एजेंसी का कहना है कि बथुला महेंदर को उनके कार्यालय में उस समय पकड़ा गया जब वे कथित रूप से रिश्वत की शेष ₹4 लाख राशि की मांग कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत लाभ के लिए अवैध आर्थिक फायदा लेने की कोशिश की। ट्रैप कार्रवाई के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

गिरफ्तारी के बाद एसीबी अधिकारियों ने आरोपी के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान लगभग ₹13 लाख की बेहिसाबी नकदी बरामद होने का दावा किया गया। इसके अलावा सोने के आभूषण और कई संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। जांचकर्ता अब इन दस्तावेजों और संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार बरामद नकदी और अन्य संपत्तियों की तुलना आरोपी की ज्ञात आय के स्रोतों से की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या साइबर अपराध जांच के दौरान अन्य लोगों से भी इसी प्रकार की अवैध मांग की गई थी। मामले के वित्तीय पहलुओं की गहन जांच के लिए बैंक रिकॉर्ड, निवेश और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराध जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार यदि जांच संबंधी शक्तियों का इस्तेमाल व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए किया जाता है तो इससे न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कमजोर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच होना आवश्यक है ताकि कानून के शासन और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता बनी रहे।

फिलहाल बथुला महेंदर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जांच एजेंसियां न्यायिक हिरासत की मांग कर सकती हैं ताकि वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त संपत्तियों और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि बरामद नकदी, सोने और संपत्ति दस्तावेजों के विश्लेषण से मामले में आगे और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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