हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गेमिंग ऐप और फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठगने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस की कार्रवाई में इस नेटवर्क से जुड़े 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें B.Tech और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्र भी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में कई करोड़ रुपये की ठगी की आशंका जताई गई है।
जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क पढ़े-लिखे युवाओं द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो अच्छे और संपन्न परिवारों से आते हैं। इनमें B.Tech, Management और B.Com जैसी डिग्रियों के छात्र शामिल हैं। कई आरोपियों ने स्पोकन इंग्लिश और अन्य प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी ली थी, लेकिन तेज़ी से पैसा कमाने और शॉर्टकट की मानसिकता ने उन्हें साइबर अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders
गिरफ्तार आरोपियों में लखनऊ के देवा रोड स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन B.Tech सेकेंड ईयर छात्र—हर्षित, अंशुमान और अर्जुन—भी शामिल बताए गए हैं। इन छात्रों पर आरोप है कि इन्होंने गेमिंग ऐप्स और फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए एक संगठित ठगी नेटवर्क तैयार किया, जिसका इस्तेमाल देशभर में लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब बघौली क्षेत्र में रहने वाला एक नेपाली मूल का चौकीदार इस जाल में फंस गया। वह अपने परिवार को नेपाल में ₹40,000 भेजने के लिए सुरक्षित ऑनलाइन माध्यम खोज रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने फर्जी कॉल के जरिए खुद को डिजिटल पेमेंट एक्सपर्ट बताकर उसका भरोसा जीत लिया।
इसके बाद पीड़ित को एक UPI आईडी पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। पैसे ट्रांसफर होते ही रकम गायब हो गई और पीड़ित के परिवार तक नहीं पहुंची। कुछ समय बाद ठगी का एहसास होने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान साइबर नेटवर्क की परतें खुलती गईं और पता चला कि यह गिरोह सिर्फ हरदोई तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ, बहराइच, गाजीपुर, सीतापुर, सिद्धार्थनगर और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में जदुवीर सिंह उर्फ जस्सी सिंह (बहराइच), शुभम गुप्ता उर्फ रजनीश (गाजीपुर), लवकुश सिंह (रामगांव), आयुष सिंह (कौंडी), लवकुश गुप्ता (हुजूरपुर), अर्जुन कुमार रावत (सीतापुर), हर्षित सिंह (समरदहा), अंशुमान पांडेय (सिद्धार्थनगर) और गगन साहू (दुर्ग, छत्तीसगढ़) शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 4 लैपटॉप, 2 टैबलेट और 68 सिम कार्ड बरामद किए, जिनका इस्तेमाल फर्जी कॉल करने, नकली अकाउंट बनाने और साइबर ठगी को अंजाम देने में किया जाता था।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह गेमिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अब तक कई करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क है, जो बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था।
इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे गिरोह “सोशल इंजीनियरिंग” तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें भरोसा, भावनात्मक जुड़ाव और लालच के जरिए लोगों को फंसाया जाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ जागरूकता की कमी अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, डिजिटल फुटप्रिंट और अन्य राज्यों में जुड़े संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे संभव हैं, जिससे इस साइबर रैकेट की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।
