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पहले प्यार, फिर निवेश और आखिर में धोखा: ‘रोमांस-क्रिप्टो स्कैम’ में युवक से करोड़ों की ठगी

Team The420
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हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती धीरे-धीरे करोड़ों रुपये की ठगी में बदल गई। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने एक व्यक्ति को प्रेमजाल में फंसाकर बिटकॉइन निवेश के नाम पर करीब ₹1 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। इस मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि साइबर गिरोह अब भावनात्मक भरोसे और डिजिटल निवेश योजनाओं को मिलाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

पीड़ित हरिओम सिंह, जो गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के ब्रजघाट निवासी बताए गए हैं, ने साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि करीब डेढ़ से दो महीने पहले उनकी फेसबुक पर आशा गुप्ता नाम की एक महिला से दोस्ती हुई थी। शुरुआत में सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन धीरे-धीरे महिला ने भावनात्मक रूप से उनके करीब आकर भरोसा जीत लिया। लगातार चैट और फोन कॉल के जरिए दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई और इसी दौरान आरोपी महिला ने खुद को एक सफल निवेश सलाहकार की तरह पेश करना शुरू कर दिया।

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कुछ समय बाद महिला ने बिटकॉइन और अन्य डिजिटल एसेट्स में निवेश कर कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में उसने कम रकम निवेश करवाकर कथित तौर पर दोगुना रिटर्न भी दिया, जिससे पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया गया। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी महिला ने धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹15 लाख सहित कुल मिलाकर लगभग ₹1 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कर दिए। ये ट्रांजैक्शन PhonePe, RTGS और अन्य ऑनलाइन बैंकिंग माध्यमों के जरिए किए गए। जांच में सामने आया है कि रकम करीब 10 से 12 अलग-अलग खातों में भेजी गई थी, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि ठगी किसी संगठित साइबर नेटवर्क द्वारा अंजाम दी गई।

पीड़ित ने जब निवेश की गई रकम वापस मांगी, तब आरोपी महिला लगातार यह भरोसा दिलाती रही कि “पैसा जल्द दोगुना होकर वापस मिलेगा।” बाद में उसने हरिओम सिंह पर और ₹30 लाख निवेश करने का दबाव बनाया। लगातार बढ़ती मांग और रकम वापसी में देरी के बाद पीड़ित को शक हुआ कि वह किसी बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।

बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम 28 फरवरी 2026 से 22 अप्रैल 2026 के बीच चला। इस दौरान आरोपी लगातार सोशल मीडिया चैट, वीडियो कॉल और फोन कॉल के जरिए संपर्क में रहे और निवेश बढ़ाने के लिए मानसिक दबाव बनाते रहे। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी पहले भावनात्मक रिश्ता बनाकर भरोसा जीतते हैं और फिर निवेश के नाम पर आर्थिक शोषण शुरू करते हैं।

पीड़ित ने पुलिस को बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स, UTR नंबर, मोबाइल नंबर और डिजिटल भुगतान से जुड़े कई दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। साइबर पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें पैसा ट्रांसफर हुआ। इसके साथ ही मोबाइल नंबरों, डिजिटल वॉलेट्स और बैंकिंग रिकॉर्ड की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “साइबर अपराधी अब रोमांस, निवेश और क्रिप्टोकरेंसी को मिलाकर नए तरह के जाल बिछा रहे हैं। शुरुआत में छोटा मुनाफा देकर भरोसा पैदा किया जाता है और बाद में बड़ी रकम हड़प ली जाती है।”

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर बने नए संबंधों के आधार पर किसी भी निवेश योजना पर भरोसा न करें। विशेष रूप से बिटकॉइन, क्रिप्टोकरेंसी और हाई-रिटर्न स्कीम्स के नाम पर मिलने वाले ऑफर्स की स्वतंत्र रूप से जांच करना बेहद जरूरी है।

अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन निवेश, डिजिटल भुगतान या साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और इसमें म्यूल बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।

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