नई दिल्ली। हैदराबाद का प्रसिद्ध चिलकुर बालाजी मंदिर, जिसे आमतौर पर “वीजा मंदिर” के नाम से जाना जाता है, अब अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए तीखे हमले के बाद यह मंदिर अचानक अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। सीनेटर ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त कर अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित कर रही हैं और इसी “ग्लोबल वीजा नेटवर्क” का प्रतीक हैदराबाद का यह मंदिर बन चुका है।
करीब 500 साल पुराने चिलकुर बालाजी मंदिर में हर साल हजारों छात्र, आईटी प्रोफेशनल्स और नौकरी तलाशने वाले लोग अमेरिका का वीजा मिलने की कामना लेकर पहुंचते हैं। यही वजह है कि समय के साथ इसे “वीजा बालाजी” के नाम से लोकप्रिय पहचान मिली। लेकिन अब अमेरिकी राजनीति में H-1B वीजा और विदेशी रोजगार कार्यक्रमों पर बढ़ती बहस ने इस धार्मिक स्थल को भी विवादों के दायरे में ला दिया है।
रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में H-1B, L1, F1 और OPT जैसे वीजा कार्यक्रमों की आलोचना करते हुए दावा किया कि इनका इस्तेमाल अमेरिकी नौकरियों को कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों से बदलने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी टेक कंपनियां एक तरफ अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं, जबकि दूसरी ओर हजारों H-1B वीजा आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं।
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सीनेटर ने अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि कुछ प्रमुख टेक कंपनियों में बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों को औसत अमेरिकी वेतन से कम भुगतान पर नियुक्त किया गया। हालांकि, इन दावों को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक और कारोबारी स्तर पर मतभेद दिखाई दे रहे हैं।
भारतीय आईटी इंडस्ट्री और छात्रों के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि H-1B वीजा लंबे समय से भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी पाने का सबसे बड़ा माध्यम रहा है। भारत से हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और टेक विशेषज्ञ अमेरिकी कंपनियों में नियुक्त होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी चुनावी माहौल में वर्क वीजा हमेशा एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। बेरोजगारी, वेतन दबाव और आउटसोर्सिंग जैसे मुद्दों को लेकर कई नेता विदेशी वर्कफोर्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैं। लेकिन टेक इंडस्ट्री का एक बड़ा वर्ग यह तर्क देता है कि कुशल विदेशी पेशेवर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
एक इमिग्रेशन नीति विशेषज्ञ के अनुसार, H-1B और OPT जैसे कार्यक्रम अमेरिकी टेक सेक्टर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका कहना है कि सिलिकॉन वैली की कई बड़ी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं पर काफी हद तक निर्भर हैं और अचानक कड़े प्रतिबंध लगाने से टेक इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है।
इधर सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने चिलकुर बालाजी मंदिर को भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया, जबकि कुछ अमेरिकी यूजर्स ने इसे विदेशी वर्क वीजा सिस्टम के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देखा।
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स में चिंता बढ़ गई है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका पहले ही OPT, H-1B और छात्र वीजा नियमों को लेकर कई स्तरों पर सख्ती के संकेत दे चुका है। हाल के महीनों में अमेरिकी एजेंसियों द्वारा विदेशी छात्रों और वर्क परमिट सिस्टम की जांच भी तेज की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले अमेरिकी चुनावों तक H-1B और विदेशी रोजगार नीति बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी रह सकती है। ऐसे में इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों, छात्रों और अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हजारों पेशेवरों पर भी पड़ सकता है।
