ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात साइबर अपराधियों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर KYC अपडेट कराने और क्रेडिट कार्ड बंद कराने का झांसा देकर दो लोगों से करीब ₹3 लाख की ठगी कर ली। दोनों मामलों में ठगों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से OTP, कार्ड डिटेल और गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर खातों से रकम निकाल ली।
पहला मामला मुरार थाना क्षेत्र के बंसीपुर का है, जहां 41 वर्षीय प्रीतम कुशवाहा को 30 मई को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए कहा कि यदि KYC अपडेट नहीं कराया गया तो बैंकिंग सेवाएं बंद हो सकती हैं। बातचीत के दौरान आरोपी ने भरोसा जीतकर पीड़ित के मोबाइल पर आए OTP की जानकारी हासिल कर ली। जैसे ही OTP साझा किया गया, कुछ ही मिनटों में खाते से ₹1,73,931 निकाल लिए गए। रकम कटने का मैसेज आने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, लेकिन तब तक आरोपी संपर्क से बाहर हो चुका था।
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दूसरा मामला गोला का मंदिर क्षेत्र के महाराणा प्रताप नगर का है, जहां 40 वर्षीय आनंद शर्मा को 2 मई को इसी तरह का कॉल आया। आरोपी ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका क्रेडिट कार्ड सक्रिय है और यदि उसे बंद नहीं कराया गया तो हर साल अतिरिक्त शुल्क कट सकता है। इसी बहाने उसने पीड़ित से क्रेडिट कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और PIN हासिल कर लिया। इसके बाद तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में ₹95,000, ₹25,000 और ₹4,000 निकालकर कुल ₹1,24,000 की ठगी कर ली गई।
दोनों मामलों में पीड़ितों को तब ठगी का पता चला जब उनके मोबाइल पर लगातार पैसे कटने के मैसेज आने लगे। आनन-फानन में बैंक खातों को ब्लॉक कराया गया और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद दोनों मामलों की जांच साइबर सेल को सौंप दी गई है।
साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और इसके पीछे कौन सा संगठित नेटवर्क सक्रिय है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि रकम को कई लेयर वाले खातों में घुमा कर ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, ठग कॉल के दौरान खुद को बैंक प्रतिनिधि के रूप में पेश करते हैं और बेहद पेशेवर तरीके से बातचीत कर भरोसा जीत लेते हैं। इसी दौरान OTP, कार्ड नंबर और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर ली जाती है। इसके बाद कुछ ही मिनटों में डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाल ली जाती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में सबसे बड़ी कमजोरी मानव व्यवहार होता है, क्योंकि लोग जल्दबाजी में जानकारी साझा कर देते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बैंकिंग सुरक्षा के बावजूद सोशल इंजीनियरिंग आधारित ठगी लगातार बढ़ रही है।
इस संदर्भ में साइबर सुरक्षा और अनुसंधान से जुड़ी संस्था Future Crime Research Foundation ने चेतावनी दी है कि भारत में KYC अपडेट, कार्ड ब्लॉक और डिजिटल वेरिफिकेशन के नाम पर होने वाली ठगी तेजी से बढ़ रही है। संस्था के अनुसार अपराधी तकनीकी से अधिक मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आम लोग आसानी से फंस जाते हैं।
FCRF ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर OTP, CVV, PIN या बैंक से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा न करें। बैंक कभी भी फोन पर ऐसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगते। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की तकनीकी जांच कर रही है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन तथा डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है। मामला सामने आने के बाद एक बार फिर साइबर जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
