अहमदाबाद। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक कथित भर्ती घोटाले का गुजरात में पर्दाफाश हुआ है। पंचमहल जिले की हलोल ग्रामीण पुलिस ने भारत परमार नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिस पर खुद को भारतीय खाद्य निगम (FCI) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर सरकारी नौकरियां दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में करीब ₹68 लाख की ठगी का खुलासा हुआ है, हालांकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि घोटाले का दायरा इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी भारत परमार की शिक्षा केवल सातवीं कक्षा तक हुई थी, लेकिन उसने खुद को प्रभावशाली सरकारी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर लोगों का भरोसा जीत लिया। वह दावा करता था कि विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में उसके मजबूत संपर्क हैं और उसके माध्यम से नौकरी प्राप्त करना आसान है।
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जांच में सामने आया है कि आरोपी ने गुजरात के विभिन्न जिलों में एजेंटों का एक नेटवर्क तैयार कर रखा था। ये एजेंट नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों तक पहुंचते थे तथा उन्हें विश्वास दिलाते थे कि मोटी रकम के बदले सरकारी नौकरी सुनिश्चित कराई जा सकती है। आरोपी कथित तौर पर ओएनजीसी समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भर्ती कराने का दावा करता था।
ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए उम्मीदवारों को फर्जी इंटरव्यू कॉल लेटर, नकली नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और सरकारी संस्थानों के नाम पर तैयार किए गए जाली पत्र उपलब्ध कराए जाते थे। कई लोग इन दस्तावेजों को देखकर यह मान बैठते थे कि उनकी भर्ती प्रक्रिया वास्तव में चल रही है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कई पीड़ितों ने पुलिस के समक्ष समान प्रकार की शिकायतें दर्ज कराईं। जांच के दौरान एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी ने विस्तृत शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि वर्ष 2020 में उनकी मुलाकात भारत परमार से हुई थी। आरोपी ने स्वयं को FCI का निदेशक बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह उनके बेटे को सरकारी नौकरी दिला सकता है।
शिकायत के अनुसार, बेटे की नियुक्ति सुनिश्चित कराने के नाम पर आरोपी ने आरटीजीएस ट्रांजैक्शन और नकद भुगतान के जरिए ₹7.78 लाख से अधिक की राशि प्राप्त की। बाद में उसने एक कथित नियुक्ति पत्र भी सौंपा, लेकिन न तो कोई इंटरव्यू हुआ और न ही किसी प्रकार की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी।
समय बीतने पर शिकायतकर्ता को संदेह हुआ और उसने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने लगभग ₹3 लाख वापस कर दिए, लेकिन शेष राशि लौटाने में विफल रहा। इसके बाद जब अन्य शिकायतों की जांच की गई तो कई और लोगों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी सामने आई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अब तक करीब ₹68 लाख की ठगी का अनुमान लगाया गया है।
साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने निगरानी अभियान चलाकर हलोल-गोधरा बाईपास मार्ग स्थित एक गेस्ट हाउस से भारत परमार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से विभिन्न खातों से संबंधित 15 से अधिक बैंक पासबुक, आठ मोबाइल फोन, FCI के नाम वाले डुप्लीकेट लेटरहेड, फर्जी नियुक्ति पत्र और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर प्रभावशाली पदों और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में धनराशि की मांग को गंभीर चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए और उम्मीदवारों को केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रियाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल पुलिस आरोपी के बैंक लेनदेन, संपर्कों और एजेंट नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह रैकेट कई वर्षों से सक्रिय था और इसके तार गुजरात के विभिन्न जिलों तक फैले हो सकते हैं। पुलिस आरोपी के सहयोगियों, ड्राइवर और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ इस भर्ती घोटाले से जुड़े कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
