गाजियाबाद/नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पाकिस्तान से जुड़े कथित आतंकी जासूसी नेटवर्क मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पांच नाबालिगों के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट किशोर न्याय बोर्ड में दाखिल कर दी है। एजेंसी के अनुसार, ये सभी आरोपी देश की सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित करने वाली साजिश में शामिल पाए गए हैं।
यह मामला मार्च महीने में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के कौशांबी थाने में दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि रेलवे स्टेशनों सहित कई संवेदनशील और रणनीतिक स्थानों पर सोलर पावर से संचालित कैमरे लगाए गए थे, जिनकी लाइव फीड पाकिस्तान स्थित संदिग्ध आतंकियों तक पहुंचाई जा रही थी।
एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद खुलासा किया कि पांचों नाबालिग अन्य आरोपियों के संपर्क में थे और उन्होंने संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें, वीडियो और जीपीएस आधारित लोकेशन डेटा पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। एजेंसी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और इसका उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण ढांचे की निगरानी करना था।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने न केवल प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध रूप से प्रवेश किया, बल्कि वहां कैमरा उपकरण लगाने और उन्हें सक्रिय रखने में भी मदद की। इन कैमरों के जरिए प्राप्त डेटा को बाद में डिजिटल माध्यम से बाहर भेजा जाता था, जिसमें जियो-टैगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि लोकेशन की सटीक पहचान की जा सके।
एनआईए ने यह भी बताया कि इस मामले में अब तक कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कई वयस्क संदिग्ध शामिल हैं, जबकि पांच नाबालिगों के खिलाफ अलग से जांच रिपोर्ट दाखिल की गई है। अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है और एजेंसी नेटवर्क के पूरे विस्तार को खंगालने में जुटी है।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपियों ने पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध तत्वों के लिए भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने में मदद की, जिनका इस्तेमाल संचार और डेटा ट्रांसफर के लिए किया गया। यह नेटवर्क विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा था और इसमें स्थानीय संपर्कों का उपयोग कर संवेदनशील जानकारी जुटाई जा रही थी।
एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में तकनीकी निगरानी, डिजिटल फॉरेंसिक और मोबाइल डेटा विश्लेषण के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इन सुरागों से यह संकेत मिलता है कि नेटवर्क का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं, बल्कि रणनीतिक सूचनाओं का व्यवस्थित संग्रह और ट्रांसफर करना था।
एनआईए ने कहा है कि इस तरह के मामलों में युवाओं और नाबालिगों के शामिल होने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि उन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए आसानी से प्रभावित किया जा रहा है। एजेंसी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल सक्रिय है।
फिलहाल, सभी नाबालिगों के खिलाफ मामला किशोर न्याय प्रणाली के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि बाकी आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
