नई दिल्ली। बहुचर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली की विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ के गारे पाल्मा IV/1 कोल ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में उद्योगपति और लोकसभा सांसद नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख समेत अन्य आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर विस्तृत चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को 17 जुलाई को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत सामग्री का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया मामले में आगे की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए मामले की न्यायिक जांच आवश्यक है।
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अदालत द्वारा जिन लोगों और संस्थाओं को समन जारी किया गया है, उनमें नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एस.के. अग्रवाल, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड तथा जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (वर्तमान में नालवा संस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड) शामिल हैं।
मामले की जड़ें वर्ष 2012 में शुरू हुई उस प्रारंभिक जांच से जुड़ी हैं, जो केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निर्देश पर शुरू की गई थी। उस समय तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित द्वारा कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में वर्ष 1993 से 2005 के बीच आवंटित 24 कोयला ब्लॉकों में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया था।
सीबीआई ने गारे पाल्मा IV/1 कोल ब्लॉक से संबंधित आरोपों की जांच के बाद वर्ष 2014 में एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कोल ब्लॉक संचालन के दौरान कई स्तरों पर कथित अनियमितताएं सामने आईं। इनमें स्वीकृत सीमाओं से बाहर खनन करना, निर्धारित सीमा से अधिक कोयला निकालना, कोयला धुलाई संयंत्रों से निकलने वाले उत्पादों की बिना अनुमति बिक्री तथा कुछ गतिविधियों को वैध दिखाने के लिए बैठकों के रिकॉर्ड में कथित रूप से गलत विवरण दर्ज करना शामिल है।
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि यह कोल ब्लॉक मामलों से संबंधित सबसे विशाल चार्जशीटों में से एक है। सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट में 778 दस्तावेज शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या एक लाख से अधिक पन्नों तक पहुंचती है। इसके अतिरिक्त अभियोजन पक्ष ने 234 गवाहों को सूचीबद्ध किया है, जिनके बयान और दस्तावेजी साक्ष्य मामले का आधार बने हैं।
न्यायालय ने यह भी नोट किया कि चार्जशीट दाखिल होने में हुई लंबी देरी के पीछे कई कारण रहे। इनमें भारी मात्रा में रिकॉर्ड की जांच, बड़ी संख्या में गवाहों से पूछताछ तथा सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने की जटिल प्रक्रिया प्रमुख रही। अदालत ने माना कि इन कारणों से जांच और आरोपपत्र दाखिल करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।
सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत कथित अपराधों का संज्ञान लिया है। अदालत का कहना है कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा, लेकिन फिलहाल मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद लंबे समय से देश के सबसे चर्चित आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में इस मामले में अदालत द्वारा जारी समन को कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अब 17 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, जहां आरोपियों की उपस्थिति के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।
