बेंगलुरु। कथित ₹1,000 करोड़ के ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड मामले में बड़ा कदम उठाते हुए बेंगलुरु की विशेष अदालत ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को गेम्सक्राफ्ट के फाउंडर विकास तनेजा की पांच दिन की हिरासत दे दी। अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें 13 मई 2026 तक ED की कस्टडी में रखा जाएगा, ताकि उनसे मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत विस्तृत पूछताछ की जा सके।
यह आदेश प्रधान सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के प्रभारी न्यायाधीश शंकरप्पा निम्मन्ना कलकणी ने पारित किया। अदालत ने माना कि चल रही जांच के दौरान हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि मामला ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।
अधिकारियों के अनुसार, विकास तनेजा को PMLA की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित रूप से अपराध की आय (proceeds of crime) को उत्पन्न करने और उसे संभालने में भूमिका निभाई। वे गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीकल्चर टेक्नोलॉजीज के निदेशक भी हैं, जो इस जांच के दायरे में हैं।
इस मामले में ED पहले ही दो अन्य सह-संस्थापकों दीपक सिंह और पृथ्वी राज सिंह को भी गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों को दिल्ली-एनसीआर से ट्रांजिट रिमांड पर बेंगलुरु लाया गया है और उन्हें भी अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
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यह पूरा मामला इस साल दर्ज तीन एफआईआर से शुरू हुआ था, जो तेलंगाना में दर्ज की गई थीं। इन्हीं एफआईआर के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि गेम्सक्राफ्ट और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स ने ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग सेवाओं में कथित रूप से धोखाधड़ीपूर्ण तरीके अपनाए।
ED के अनुसार, रम्मीकल्चर और रम्मीटाइम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को रेफरल बोनस, प्रमोशनल ऑफर्स और टूर्नामेंट रिवॉर्ड्स के जरिए आकर्षित किया जाता था। आरोप है कि शुरुआती चरण में कुछ खिलाड़ियों को जानबूझकर छोटे गेम्स में जीत दी जाती थी, ताकि वे अधिक राशि निवेश करें।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि कंपनी यह कहकर प्रचार करती थी कि गेमिंग में किसी प्रकार के बॉट या मैनिपुलेशन का उपयोग नहीं होता, लेकिन जांच रिपोर्ट में कई संदिग्ध पैटर्न पाए गए हैं। इनमें दोहराए गए कार्ड पैटर्न, स्कोर में समानता, अचानक लॉगआउट, अकाउंट ब्लॉकिंग और संभावित खिलाड़ियों की मिलीभगत जैसे संकेत शामिल हैं।
एक प्रमुख आरोप यह भी है कि वित्तीय वर्ष 2020–21 और 2021–22 के दौरान लगभग ₹100 करोड़ को सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और कंसल्टेंसी जैसी कैटेगरी में खर्च के रूप में दिखाया गया। ED का दावा है कि कुछ वेंडर्स ने कमीशन, GST और TDS काटकर यह राशि नकद में वापस लौटा दी, जिससे फंड की लेयरिंग की आशंका बढ़ती है।
अधिकारियों के अनुसार, विकास तनेजा पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपराध की आय को छिपाने और इस्तेमाल करने में भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया है कि हजारों यूजर आईडी को एक ही बैंक अकाउंट से जोड़ा गया, जो कंपनी की शर्तों का उल्लंघन है।
जांच में यह भी पाया गया है कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रतिबंध के बावजूद यूजर्स इन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना रहे थे।
हाल ही में ED ने दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक में 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। पूरे मामले में कथित फ्रॉड का अनुमान करीब ₹1,000 करोड़ लगाया गया है।
इसके अलावा, कंपनी के पूर्व CFO रमेश प्रभु से जुड़े एक अलग मामले में भी जांच चल रही है, जिसमें लगभग ₹270.43 करोड़ के गबन का आरोप है।
अधिकारियों का कहना है कि विकास तनेजा की कस्टोडियल पूछताछ से फंड ट्रेल, लाभार्थियों और पूरे नेटवर्क की संरचना को समझने में मदद मिलेगी। जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे तथा कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
