नई दिल्ली। ऑनलाइन बेबी प्रोडक्ट्स रिटेलर FirstCry को एक उपभोक्ता के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कंपनी को एक ग्राहक को ₹50,000 का मुआवजा, ₹2,130 की मूल राशि पर ब्याज सहित रिफंड और ₹5,000 मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। आयोग ने पाया कि कंपनी ने बिना पर्याप्त कारण बताए ग्राहक का ऑर्डर रद्द कर दिया, उसकी राशि वापस नहीं की और आंतरिक रिकॉर्ड में उसे “फ्रॉड यूजर” के रूप में चिह्नित कर दिया।
मामला शिकायतकर्ता शेख अल्ताफ से जुड़ा है, जिन्होंने 1 दिसंबर 2024 को FirstCry से बच्चों की एक ट्राइसाइकिल ऑर्डर की थी। इसके लिए उन्होंने PhonePe के माध्यम से ₹2,130.06 का भुगतान किया था। शिकायत के अनुसार, ऑर्डर के अगले ही दिन उसे बिना किसी स्पष्ट कारण के रद्द कर दिया गया और भुगतान की गई राशि भी वापस नहीं की गई।
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जब अल्ताफ ने कंपनी के ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनकी राशि वर्ष 2023 के एक पुराने लेनदेन के विरुद्ध समायोजित कर दी गई है। कंपनी का आरोप था कि पुराने ऑर्डर में उन्होंने गलत उत्पाद लौटाकर रिफंड प्राप्त किया था जबकि मूल सामान अपने पास रखा था। हालांकि शिकायतकर्ता ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।
अल्ताफ का कहना था कि वर्ष 2023 में की गई वापसी प्रक्रिया कंपनी की निर्धारित नीति के अनुसार पूरी हुई थी। उत्पाद की पिकअप, वेयरहाउस में गुणवत्ता जांच और सत्यापन के बाद ही रिफंड जारी किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कंपनी की ओर से उन्हें किसी प्रकार की शिकायत, नोटिस, ईमेल या फोन कॉल नहीं की गई थी, जिससे यह संकेत मिलता कि उनके खिलाफ किसी प्रकार का संदेह या जांच चल रही थी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि FirstCry ने अपने आंतरिक सिस्टम में उक्त ऑर्डर को “Fraud User Order Cancel” श्रेणी में दर्ज किया था। आयोग ने इस पहलू को गंभीर माना और कहा कि किसी उपभोक्ता को बिना जांच, बिना नोटिस और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए धोखेबाज के रूप में चिह्नित करना उसके सम्मान और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है।
आयोग ने अपने आदेश में कंपनी के रुख को विरोधाभासी बताया। रिकॉर्ड के अनुसार, FirstCry ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के समक्ष स्वीकार किया था कि वर्ष 2023 के विवादित लेनदेन में रिफंड पहले ही जारी किया जा चुका था। इसके बावजूद बाद में उसी लेनदेन को आधार बनाकर नए ऑर्डर का भुगतान रोकना और धोखाधड़ी का आरोप लगाना आयोग को उचित नहीं लगा।
आयोग ने टिप्पणी की कि यदि किसी पुराने रिटर्न को सत्यापन के बाद स्वीकार कर रिफंड दे दिया गया था, तो बाद में उसी आधार पर उपभोक्ता के खिलाफ कार्रवाई करना मनमाना कदम माना जाएगा। आदेश में कहा गया कि ऑर्डर रद्द करना, धनराशि रोकना, अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग दलीलें देना और उचित प्रक्रिया के बिना ग्राहक को “फ्रॉड” बताना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने के बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने अल्ताफ से तीन बार संपर्क किया था और समझौते के तौर पर ₹2,190 रिफंड तथा ₹15,000 मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा था। आयोग ने इसे प्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति नहीं माना, लेकिन इसे इस संकेत के रूप में देखा कि कंपनी विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रही थी।
कंपनी की यह दलील भी आयोग ने खारिज कर दी कि संबंधित ऑर्डर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत भुगतान रिकॉर्ड और ऑर्डर विवरण को पर्याप्त साक्ष्य माना गया, जबकि कंपनी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों को अस्पष्ट और अविश्वसनीय बताया गया।
अंततः आयोग ने FirstCry को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹2,130 की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए, ₹50,000 मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए मुआवजा दे तथा ₹5,000 मुकदमे का खर्च भी अदा करे। साथ ही आयोग ने कंपनी को भविष्य में ऐसी अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर रोक लगाने की भी सलाह दी।
