आजमगढ़ पुलिस ने फर्जी फर्मों और म्यूल बैंक खातों के जरिए संचालित कथित ₹110 करोड़ के साइबर ठगी रैकेट का खुलासा कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया

नकली APK के जरिए मोबाइल हैक कर बैंक खाते साफ करने वाला साइबर गिरोह बेनकाब, मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जो नकली APK फाइलों के जरिए लोगों के मोबाइल फोन का पूरा रिमोट एक्सेस हासिल कर बैंक खातों से पैसे उड़ा लेते थे।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और तकनीकी सुरक्षा सिस्टम को भी चकमा देने में माहिर था। गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड यूपी के देवरिया जिले से गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसका एक सहयोगी गोरखपुर से पकड़ा गया। दोनों मिलकर देशभर में साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को फोन कर खुद को कस्टमर केयर या बैंक अधिकारी बताते थे। इसके बाद “कस्टमर केयर सपोर्ट” नाम का एक APK फाइल व्हाट्सऐप या अन्य माध्यमों से भेजकर उसे इंस्टॉल करवाया जाता था। जैसे ही यह एप फोन में डाउनलोड होता, आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल का पूरा रिमोट एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद वे बैंकिंग ऐप, ओटीपी और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बनाकर खाते खाली कर देते थे।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड अभय साहनी मात्र आठवीं पास है, जिसने यूट्यूब और टेलीग्राम के जरिए हैकिंग और साइबर फ्रॉड की तकनीक सीखी थी। वह टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर खुद के बनाए हुए मॉडिफाइड APK फाइल साइबर अपराधियों को बेचता था और बदले में मोटी रकम वसूलता था।

गिरफ्तार दूसरे आरोपी उमेश कुमार रजक पर आरोप है कि वह इन्हीं APK फाइलों को खरीदकर लोगों को ठगता था। एक मामले में उसने बिजली बिल अपडेट के नाम पर एक पीड़ित से करीब 1,20,999 रुपये की ठगी की थी। पीड़ित को धमकी दी गई थी कि यदि तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो उसका बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह तकनीकी रूप से काफी उन्नत तरीके से काम करता था। इनके द्वारा बनाए गए एप सामान्य एंटी-वायरस या सुरक्षा सिस्टम को भी बायपास कर लेते थे, जिससे यूजर को खतरे का पता नहीं चलता था। आरोपी टेलीग्राम के जरिए देशभर में इन ऐप्स की बिक्री करते थे और हर ऐप के लिए लगभग चार हजार रुपये तक वसूलते थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड अब तक 40 से 50 APK फाइलें बेच चुका था और खुद भी 20 से 25 लोगों से ठगी कर चुका है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 स्मार्टफोन, 11 डेबिट कार्ड, आठ सिम कार्ड, एक क्रिप्टो हार्डवेयर वॉलेट और एक कार बरामद की है।

क्रिप्टो वॉलेट को लेकर भी जांच जारी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने कितनी रकम डिजिटल करेंसी के रूप में छिपा रखी है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार किन अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां साधारण मोबाइल यूजर को फंसाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच जारी है और अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है।

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