eSIM फ्रॉड के जरिए मोबाइल नंबर पर कब्जा कर बैंकिंग और ई-कॉमर्स अकाउंट्स से ₹3.99 लाख की ठगी।

एक कॉल, बंद हुआ नेटवर्क और खाते से उड़ गए ₹3.99 लाख: eSIM फ्रॉड का बड़ा खुलासा

Team The420
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नई दिल्ली। डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल आधारित सेवाओं के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच eSIM फ्रॉड अब साइबर अपराधियों का नया हथियार बनता जा रहा है। राजधानी दिल्ली में सामने आए एक मामले ने यह साफ कर दिया है कि केवल एक फर्जी कॉल के जरिए भी साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की पूरी डिजिटल पहचान पर कब्जा कर सकते हैं। शाकुर बस्ती इलाके के एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी में अपराधियों ने पहले उसके मोबाइल नंबर का नियंत्रण हासिल किया और फिर उसी के जरिए बैंकिंग तथा ई-कॉमर्स अकाउंट्स तक पहुंच बनाकर करीब ₹3.99 लाख की ऑनलाइन खरीदारी कर डाली।

मामले की जांच के बाद बिहार के जमुई जिले से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और दो एलईडी टीवी बरामद किए गए हैं, जिन्हें कथित तौर पर ठगी की रकम से खरीदा गया था।

जानकारी के अनुसार पीड़ित को कुछ दिन पहले एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम सेवा प्रदाता का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उसके मोबाइल नंबर को eSIM में अपग्रेड किया जाना है। पीड़ित ने इस प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखाई और कॉल को समाप्त कर दिया। हालांकि इसके कुछ समय बाद अचानक उसके मोबाइल का नेटवर्क बंद हो गया। शुरुआत में उसे तकनीकी समस्या का अंदेशा हुआ, लेकिन अगले दिन जब वह टेलीकॉम स्टोर पहुंचा तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

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स्टोर पर उसे बताया गया कि उसके नंबर पर पहले ही eSIM एक्टिवेट किया जा चुका है। यानी मोबाइल नंबर का नियंत्रण किसी दूसरे डिवाइस में ट्रांसफर हो चुका था। इसी दौरान उसे यह भी पता चला कि उसका आधार प्रोफाइल लॉक कर दिया गया है। मोबाइल सेवा दोबारा शुरू कराने और बैंकिंग एक्सेस बहाल करने के बाद पीड़ित ने देखा कि उसके क्रेडिट कार्ड से कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदे जा चुके हैं।

ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए किए गए कई ऑर्डर दिखाई दिए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹3.99 लाख थी। इसके बाद साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की तकनीकी जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि सामान दिल्ली और पटना के विभिन्न अधूरे पतों पर मंगवाया गया था ताकि डिलीवरी के बाद वास्तविक पहचान छिपी रहे और ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच एजेंसियों को संदेह हुआ कि इस गतिविधि का संचालन बिहार के जमुई क्षेत्र से किया जा रहा है। इसके बाद टीम ने स्थानीय सहयोग से छापेमारी की और आरोपी सचिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर फ्रॉड के तरीके सीखता था।

जांच में यह भी पता चला कि eSIM का नियंत्रण मिलने के बाद आरोपी पीड़ित के ओटीपी, बैंकिंग अलर्ट, ईमेल और शॉपिंग अकाउंट तक पहुंच बना लेता था। इसके बाद सेव किए गए कार्ड डिटेल्स का इस्तेमाल कर महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद ऑर्डर किए जाते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी अक्सर सामान ऐसे स्थानों पर मंगवाता था जहां पूरा पता दर्ज नहीं होता था। बाद में उन उत्पादों को खुले बाजार में कम कीमत पर बेच दिया जाता था।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, eSIM स्वैप फ्रॉड बेहद खतरनाक साइबर अपराध बनता जा रहा है क्योंकि इसमें अपराधी मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग सुरक्षा की कई परतों को निष्क्रिय कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद होना, ओटीपी या बैंकिंग अलर्ट का आना बंद हो जाना और सिम से जुड़ी अनजान गतिविधियां ऐसे फ्रॉड के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या eSIM अपग्रेड अनुरोध पर तुरंत भरोसा न करें। यदि अचानक मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए तो तुरंत टेलीकॉम कंपनी, बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करना चाहिए। साथ ही बैंकिंग पासवर्ड और ईमेल सुरक्षा तुरंत बदलने की भी सलाह दी गई है।

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