नई दिल्ली/लखनऊ। देश के रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कई चर्चित मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। घर खरीदारों और निवेशकों से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में ईडी ने नोएडा स्थित एक बड़े रियल्टी प्रोजेक्ट की ₹634.12 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इस संपत्ति का अनुमानित मूल्य ₹8,115 करोड़ से अधिक आंका गया है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा और बरेली से जुड़े अन्य मामलों में भी ईडी ने जांच और पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।
ईडी की हालिया कार्रवाई नोएडा के चर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘यूनीटेक गोल्फ एंड कंट्री क्लब’ से संबंधित है। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में की गई है। जांच के दौरान परियोजना से जुड़ी भूमि, लीजहोल्ड अधिकारों और संबंधित कॉर्पोरेट संरचनाओं में हिस्सेदारी को अटैच किया गया है।
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जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी और शिकायतों पर आधारित है। आरोप है कि बड़ी संख्या में घर खरीदारों और निवेशकों से परियोजनाओं के नाम पर धन जुटाया गया, लेकिन निर्धारित समयसीमा के भीतर उन्हें अपेक्षित संपत्ति या सेवाएं नहीं मिल सकीं। इन्हीं आरोपों की पड़ताल के दौरान वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की जांच शुरू की गई।
ईडी के अनुसार, जांच में नोएडा के सेक्टर 96, 97 और 98 में स्थित सैकड़ों एकड़ भूमि से जुड़े अधिकारों की भी समीक्षा की गई। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परियोजनाओं में जुटाई गई धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या उसका किसी अन्य उद्देश्य के लिए कथित रूप से स्थानांतरण किया गया था।
इसी क्रम में ग्रेटर नोएडा से जुड़े एक अन्य चर्चित मामले में भी ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने एक प्रमुख रियल एस्टेट कारोबारी और उससे जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, निवेशकों को वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश के लिए आकर्षित किया गया था और समयबद्ध डिलीवरी का आश्वासन दिया गया था। बाद में परियोजनाओं में देरी और धन के कथित दुरुपयोग को लेकर शिकायतें सामने आईं।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि निवेशकों से जुटाई गई राशि का कुछ हिस्सा समूह की अन्य कंपनियों और संबद्ध संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया। ईडी अब संबंधित बैंक खातों, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन की श्रृंखला की जांच कर रही है। मामले में संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की जा रही है।
उधर, बरेली से जुड़े एक अन्य मामले में भी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की है। आरोप है कि एक निवेश समूह ने लोगों को असामान्य रूप से अधिक रिटर्न और आकर्षक लाभ का भरोसा देकर बड़ी मात्रा में धन जमा कराया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निवेश की अवधि पूरी होने के बाद धन वापसी में समस्याएं शुरू हुईं और बाद में कंपनी के संचालन को लेकर सवाल खड़े हो गए।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि निवेश और रियल एस्टेट से जुड़े आर्थिक अपराधों में अक्सर जटिल वित्तीय संरचनाओं, सहयोगी कंपनियों और बहुस्तरीय लेनदेन का इस्तेमाल किया जाता है। उनके अनुसार, निवेशकों को किसी भी परियोजना में धन लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, नियामकीय स्वीकृतियों और परियोजना की वास्तविक प्रगति का स्वतंत्र सत्यापन अवश्य करना चाहिए।
फिलहाल ईडी विभिन्न मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति विवरण और निवेशकों की शिकायतों का विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि धन के प्रवाह और संबंधित संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन मामलों पर अब निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि जांच के निष्कर्ष आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण खुलासे कर सकते हैं।
