नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की गई है। “डबल OTP सिस्टम” नामक इस पहल का उद्देश्य 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के खाताधारकों को डिजिटल ठगी से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है।
इस प्रणाली के तहत अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन केवल एक OTP से पूरा नहीं होगा, बल्कि दो अलग-अलग OTP की पुष्टि के बाद ही लेनदेन को मंजूरी दी जाएगी। इस बदलाव को डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर उन बुजुर्ग ग्राहकों के लिए जो अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं।
जानकारी के अनुसार, पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” के मोबाइल नंबर पर जाएगा, जिसे खाताधारक पहले से बैंक में जोड़ चुका होगा। यह ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट आमतौर पर परिवार का कोई सदस्य होता है, जो लेनदेन की पुष्टि में मदद करता है।
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बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी जैसे मामलों में बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। कई मामलों में अपराधी केवल एक OTP हासिल करके पूरे खाते को खाली कर देते हैं, लेकिन डबल OTP सिस्टम इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
इस पहल को हरियाणा पुलिस और कुछ बैंकिंग संस्थानों के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में इसे चुनिंदा बैंक शाखाओं में लागू किया गया है, जिनमें लगभग 50 शाखाएं शामिल हैं। इनमें HDFC बैंक की गुरुग्राम और पंचकूला स्थित शाखाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं, जहां इस प्रणाली का परीक्षण किया जा रहा है।
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम का उद्देश्य केवल तकनीकी सुरक्षा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि परिवार की भागीदारी को भी डिजिटल सुरक्षा प्रक्रिया में शामिल करना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी बड़े ट्रांजैक्शन को बिना किसी भरोसेमंद व्यक्ति की जानकारी के पूरा नहीं किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए बेहद जरूरी था। डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ फर्जी निवेश योजनाएं, फिशिंग लिंक और कॉल-बेस्ड धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में अतिरिक्त सत्यापन प्रणाली एक मजबूत सुरक्षा परत के रूप में काम करेगी।
वित्तीय तकनीक विशेषज्ञों के अनुसार, डबल OTP सिस्टम भले ही सुरक्षा बढ़ाता है, लेकिन इसके साथ उपयोगकर्ता अनुभव को सरल बनाए रखना भी चुनौती होगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रक्रिया को जटिल बनाए बिना इसे लागू करना सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
इस संबंध में प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि यह प्रणाली बैंकिंग सुरक्षा में एक अतिरिक्त परत जोड़ती है, जिससे यदि एक स्तर पर जानकारी लीक भी हो जाए, तो दूसरा सत्यापन लेनदेन को रोक सकता है। उन्होंने इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
सरकारी और बैंकिंग संस्थानों का मानना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे देशभर के सभी बैंकों में लागू किया जा सकता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों के वित्तीय लेनदेन में सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ जाएगा और साइबर अपराधियों के लिए ठगी करना और कठिन हो जाएगा।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी नई तकनीक के साथ जागरूकता जरूरी है। वरिष्ठ नागरिकों को इस प्रणाली के बारे में सही जानकारी देना और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करना भी उतना ही आवश्यक है।
कुल मिलाकर, डबल OTP सिस्टम को बैंकिंग सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल वित्तीय धोखाधड़ी को कम करेगा बल्कि डिजिटल बैंकिंग पर लोगों का भरोसा भी मजबूत करेगा।
