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₹700 करोड़ के DGHS खरीद घोटाले में डॉ. विनोद कुमार रंगा को जमानत नहीं, कोर्ट ने याचिका खारिज की

Team The420
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नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित ₹700 करोड़ के Directorate General of Health Services (DGHS) खरीद घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार डॉ. विनोद कुमार रंगा की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। डॉ. रंगा Central Procurement Agency (CPA) के प्रभारी रहे हैं। मामले की जांच Anti-Corruption Branch (ACB) कर रही है। कोर्ट ने फिलहाल जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है, जबकि विस्तृत आदेश अभी अपलोड नहीं किया गया है।

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विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने डॉ. रंगा की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामला दिल्ली सरकार के Directorate General of Health Services और उससे जुड़ी Central Procurement Agency में दवाओं, सर्जिकल सामग्री, उपभोग्य वस्तुओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया गया और कई चिकित्सा सामग्री ऊंची कीमतों पर खरीदी गईं, जिससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ।

ACB ने इस मामले में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें पूर्व DGHS महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल भी शामिल हैं। डॉ. अग्रवाल और डॉ. रंगा दोनों को ACB ने गिरफ्तार किया है। डॉ. अग्रवाल की जमानत याचिका पर अदालत का फैसला मंगलवार को आने की संभावना है।

2 जून को दर्ज हुई थी FIR

ACB ने 2 जून 2026 को Directorate of Vigilance की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की थी। शिकायत में DGHS और CPA के माध्यम से की गई विभिन्न खरीद प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों का विवरण दिया गया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने शिकायत के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

जांच के दौरान एजेंसी ने खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और संबंधित निजी व्यक्तियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। FIR में डॉक्टरों, सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर कर सरकारी चिकित्सा संस्थानों के लिए आवश्यक सामग्री और उपकरण निर्धारित या उचित कीमत से अधिक दरों पर खरीदे गए।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला

मामले में Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 7A के साथ Bharatiya Nyaya Sanhita, 2024 की धारा 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का फोकस कथित खरीद अनियमितताओं के पीछे जिम्मेदार लोगों की भूमिका और सरकारी धन को हुए नुकसान की पड़ताल पर है।

ACB के अनुसार, शिकायत की जांच और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के पर्याप्त आधार सामने आए, जिसके बाद FIR दर्ज की गई। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि खरीद में कथित हेरफेर किस स्तर पर हुआ और इसमें सरकारी अधिकारियों तथा निजी पक्षों की क्या भूमिका रही।

कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार

डॉ. रंगा की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद मामले में विस्तृत न्यायिक आदेश का इंतजार है। अदालत के विस्तृत आदेश में जमानत से इनकार करने के आधार स्पष्ट होंगे। इस बीच ACB की जांच जारी है और एजेंसी खरीद रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों तथा मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

मामले में पूर्व DGHS महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल की जमानत याचिका पर मंगलवार को निर्णय प्रस्तावित है। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी कथित खरीद घोटाले की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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