दिल्ली में राशन कार्ड आवंटन के बदले कथित रिश्वत मांगने के आरोप में CBI ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर को ट्रैप कर गिरफ्तार किया।

₹100 प्रति राशन कार्ड की रिश्वत का आरोप: दिल्ली खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का असिस्टेंट कमिश्नर CBI ट्रैप में गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में राशन कार्ड आवंटन प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation (CBI) ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक असिस्टेंट कमिश्नर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिकारी ने राशन कार्डों के वितरण और आवंटन के बदले प्रति कार्ड ₹100 की अवैध रकम की मांग की थी। कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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CBI की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मामला 20 मई 2026 को दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि एशियन मार्केट, पुष्प विहार, नई दिल्ली में तैनात खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर ने 475 राशन कार्डों के आवंटन और वितरण के लिए रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि अधिकारी प्रत्येक राशन कार्ड के बदले ₹100 मांग रहा था।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आसपास की प्रत्येक राशन दुकान को करीब 120 कार्ड आवंटित किए जाने का प्रस्ताव था। शिकायतकर्ता की दुकान के हिस्से आने वाले राशन कार्डों के आधार पर कथित रिश्वत की कुल रकम लगभग ₹12,000 बन रही थी। शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले का सत्यापन किया और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर मानते हुए ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की।

CBI अधिकारियों ने 21 मई को जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को आरोपी अधिकारी से संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रैप के दौरान आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर को शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके तुरंत बाद CBI टीम ने उसे हिरासत में ले लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि राशन कार्ड आवंटन प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार का दायरा कितना बड़ा था। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस तरह की अवैध वसूली लंबे समय से चल रही थी और क्या इसमें अन्य कर्मचारी या बिचौलिए भी शामिल थे।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सब्सिडी वाला अनाज पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण सरकारी व्यवस्था मानी जाती है। ऐसे में राशन कार्ड आवंटन में रिश्वतखोरी के आरोपों ने व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राशन कार्ड वितरण जैसी कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार बढ़ता है तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।

भ्रष्टाचार निरोधक मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रैप कार्रवाई सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने का प्रभावी माध्यम बनी हुई है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी और समय पर सूचना मिलने से जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई करने में मदद मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है और विभागीय प्रक्रियाओं को अधिक डिजिटल तथा पारदर्शी बनाने की जरूरत है ताकि मानव हस्तक्षेप कम हो सके।

CBI ने अपने बयान में कहा कि भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई एजेंसी की प्राथमिकताओं में शामिल है और रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए नागरिकों को आगे आना चाहिए। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अवैध भुगतान की मांग की जाती है तो उसकी सूचना तुरंत जांच एजेंसियों को दें।

फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में आरोपी अधिकारी से जुड़े वित्तीय लेनदेन, विभागीय रिकॉर्ड और अन्य संभावित कड़ियों की भी जांच की जा सकती है।

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