राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag और ANPR कैमरों के डेटा से संदिग्ध और ब्लैकलिस्टेड वाहनों पर रियल-टाइम अलर्ट मिलने में मदद होगी।

APK फाइल के जरिए मोबाइल हैक कर बैंक खाते खाली करने वाला साइबर मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Team The420
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दिल्ली में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए साइबर सेल ने एक ऐसे शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि वह मालिशियस APK फाइलों के जरिए लोगों के मोबाइल फोन में सेंध लगाकर बैंक खातों से रकम उड़ाता था। यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से फर्जी एप्लिकेशन के माध्यम से मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर कुछ ही मिनटों में खातों से भारी रकम निकाल लेता था।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान 23 वर्षीय विकास कुमार गुप्ता के रूप में हुई है, जो बिहार के छपरा का रहने वाला है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किया है, जिनका उपयोग कथित साइबर अपराधों में किया जाता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले अन्य साइबर अपराधियों को बैंक खाते किराए पर उपलब्ध कराने के काम में शामिल था, लेकिन बाद में उसने खुद का साइबर फ्रॉड नेटवर्क खड़ा कर लिया।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक डिलीवरी एजेंट ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उसके मोबाइल फोन में अचानक एक संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल हो गई, जिसके तुरंत बाद उसके बैंक खाते से 2.48 लाख रुपये अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना उत्तर ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की।

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जांच के दौरान साइबर टीम ने डिजिटल ट्रांजेक्शन ट्रेल को ट्रैक किया, जिसमें पता चला कि ठगी की गई रकम में से करीब 2 लाख रुपये बिहार स्थित एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। यह खाता विकास कुमार गुप्ता के नाम पर दर्ज पाया गया। इसके बाद पुलिस टीम बिहार के छपरा पहुंची, लेकिन आरोपी वहां से फरार मिला और उसके परिजन जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। लगातार निगरानी और तकनीकी ट्रैकिंग के आधार पर आखिरकार उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक के जरिए अन्य साइबर अपराधियों के संपर्क में आया था। इन्हीं नेटवर्क्स के माध्यम से उसे बैंक खातों की व्यवस्था की जाती थी, जिनका उपयोग अवैध लेन-देन और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था। धीरे-धीरे उसने खुद का संगठित गिरोह तैयार कर लिया और APK फाइल आधारित मालवेयर के जरिए मोबाइल डिवाइस को नियंत्रित करने लगा।

जांच में यह भी सामने आया कि ये मालिशियस APK फाइलें इंस्टॉल होते ही मोबाइल का पूरा एक्सेस अपने नियंत्रण में ले लेती थीं, जिससे बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी सीधे आरोपी तक पहुंच जाती थी। दबाव में आने के बाद आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने पीड़ित के 2.48 लाख रुपये अपने खाते में वापस ट्रांसफर कर लिए थे। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

विशेषकर हाल के महीनों में इस तरह के APK आधारित साइबर स्कैम में तेजी देखी जा रही है, जिसमें फर्जी लिंक, मैसेज और अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल का पूरा कंट्रोल हासिल किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि एक बार डिवाइस संक्रमित होने पर पूरा बैंकिंग डेटा खतरे में पड़ जाता है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता और डिजिटल सावधानी को बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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