देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बड़े राजनीतिक ठगी मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें आरोपी ने खुद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का निजी सचिव बताकर राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे से 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए आरोपी गौरव कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।
पीड़िता भावना पांडे ने शिकायत में बताया कि आरोपी ने फोन कर अपना परिचय “कनिष्क सिंह” के रूप में दिया और दावा किया कि वह राहुल गांधी का निजी सचिव है। आरोपी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में संगठनात्मक स्तर पर सर्वे चल रहा है और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की प्रक्रिया में उनका नाम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी झांसे में लेकर आरोपी ने 25 लाख रुपये की मांग की।
13 अप्रैल को आरोपी के एक सहयोगी को जाखन स्थित पीड़िता के आवास पर भेजा गया, जहां पीड़िता ने भरोसा कर नकद 25 लाख रुपये सौंप दिए। इसके बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया और फोन उठाना भी बंद कर दिया, जिससे संदेह गहराया। इसके बाद पीड़िता ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने पूरी तरह सुनियोजित तरीके से फर्जी पहचान बनाई थी और “कनिष्क सिंह” नाम से कॉलर आईडी तैयार की थी। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस की मदद से आरोपी की पहचान गौरव कुमार के रूप में हुई, जो मूल रूप से अमृतसर, पंजाब का रहने वाला है।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ठगी को अंजाम दे चुका है। वह राजनीतिक पद और टिकट दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये वसूल चुका है। वर्ष 2017 में राजस्थान में विधायक टिकट दिलाने के नाम पर 1.90 करोड़ रुपये की ठगी सहित कई मामलों का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक संगठित गिरोह से जुड़ा हुआ है, जिसमें चार अन्य सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। इनके नाम छज्जू, रजत, मदन और मनिंदर सिंह कालू बताए गए हैं। पुलिस इन सभी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ है कि आरोपी के पास कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थी, जिनका उपयोग वह लोगों का भरोसा जीतने और उन्हें भ्रमित करने के लिए करता था। वह नेताओं की बातचीत का हवाला देकर पीड़ितों को विश्वास में लेता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं से टिकट दिलाने के नाम पर संपर्क किया था। कुछ मामलों में ठगी की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि कई लोग सामाजिक दबाव के चलते खुलकर शिकायत नहीं कर पाए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था, जिसमें सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाया जाता था। आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से नेताओं की जानकारी जुटाकर फर्जी पहचान तैयार करता था।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी है। बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है ताकि ठगी की राशि के पूरे लेन-देन का पता लगाया जा सके।
फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और पुलिस उसके पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। यह मामला राजनीतिक और साइबर ठगी दोनों ही दृष्टि से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
