देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर बड़े स्तर पर कथित धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी पहाड़ के भोले-भाले लोगों, फौजियों और दूसरे राज्यों में रहने वाले उत्तराखंड मूल के व्यक्तियों को सस्ते दामों में जमीन दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और नकली अधिकार पत्रों के जरिए दूसरे लोगों की जमीन बेचने का खेल चला रखा था।
मामला उस समय सामने आया जब देहरादून के सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र निवासी विक्रम सिंह ने अक्टूबर 2025 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभय कुमार, प्रदीप सकलानी और अजय सजवाण ने ग्राम सौंडा सरोली स्थित जमीन को अपना या अपने परिचितों की संपत्ति बताकर बेचने का सौदा किया और उनसे ₹30 लाख बतौर बयाना ले लिए। बाद में पता चला कि जिन लोगों को जमीन का मालिक बताया गया था, उनका उस भूमि से कोई संबंध ही नहीं था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी विक्रय अनुबंध पत्र तैयार किए और खुद को जमीन बेचने के लिए अधिकृत बताया। पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए जमीन दिखाई गई, दस्तावेज दिखाए गए और सौदे को वैध साबित करने की कोशिश की गई। हालांकि बाद में जब असली मालिकों की जानकारी सामने आई, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने चेक दिए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। इसके बाद मुख्य आरोपी प्रदीप सकलानी लगातार फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल रहा था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹20 हजार का इनाम भी घोषित किया था।
सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने देहरादून के डालनवाला क्षेत्र की एकता कॉलोनी में दबिश दी, जहां आरोपी कथित तौर पर एक अन्य संपत्ति सौदे की बातचीत कर रहा था। कार्रवाई के दौरान प्रदीप सकलानी और अजय सजवाण को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उनके अन्य सहयोगियों और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी खासतौर पर सेना से जुड़े लोगों और पहाड़ी पृष्ठभूमि वाले परिवारों को निशाना बनाते थे। वे खुद को स्थानीय और भरोसेमंद व्यक्ति बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे। इसके बाद कम कीमत पर जमीन दिलाने का लालच देकर मोटी रकम एडवांस के तौर पर ले ली जाती थी। कई मामलों में जमीन किसी और की निकलती थी और खरीदारों को बाद में धोखाधड़ी का पता चलता था।
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी प्रदीप सकलानी के खिलाफ देहरादून जिले के अलग-अलग थानों में भूमि धोखाधड़ी से जुड़े 27 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें कई मामले करोड़ों रुपये की कथित ठगी से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों पर पहले भी गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है। इसके अलावा विभिन्न अदालतों में चेक बाउंस से जुड़े कई मामले लंबित बताए गए हैं।
भूमि और संपत्ति मामलों के जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में जमीन धोखाधड़ी के मामलों में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, नकली रजिस्ट्री दस्तावेज, जाली एग्रीमेंट और फर्जी मालिकाना दावे जैसे तरीके तेजी से सामने आए हैं। कई बार आरोपी दूर-दराज क्षेत्रों के लोगों या बाहर रहने वाले खरीदारों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि उन्हें स्थानीय जमीन रिकॉर्ड और वास्तविक स्वामित्व की पूरी जानकारी नहीं होती।
प्रसिद्ध साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि भूमि धोखाधड़ी अब संगठित अपराध का रूप लेती जा रही है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच, भूमि रिकॉर्ड सत्यापन और भुगतान से पहले मालिकाना हक की पुष्टि बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी संपत्ति सौदे से पहले राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और अधिकृत स्वामित्व की सरकारी स्तर पर जांच जरूर कराएं, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
