देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सामने आए कथित ₹20 से ₹25 करोड़ के क्रिप्टो निवेश घोटाले ने एक बार फिर देशभर में तेजी से फैल रहे डिजिटल निवेश फ्रॉड की गंभीरता उजागर कर दी है। यह मामला कथित तौर पर ₹3,200 करोड़ के बहु-राज्यीय Botbro क्रिप्टो और AI-फॉरेक्स निवेश नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी जांच पहले से विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं। मामले में दुबई स्थित वेंचर कैपिटलिस्ट लविश चौधरी का नाम सामने आया है, जिनके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
देहरादून के रायपुर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता दुर्गा बहादुर गुरूंग को करीब दो वर्ष पहले नवीन सिंह नेगी और उसके सहयोगियों ने कथित निवेश योजनाओं से परिचित कराया था। आरोप है कि Botbro, Cross Market और Mine Crypto जैसी कंपनियों को पूरी तरह वैध और अत्यधिक लाभ देने वाला प्लेटफॉर्म बताकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि निवेशकों को हर महीने 5 से 10 प्रतिशत तक रिटर्न का भरोसा दिलाया गया। शुरुआत में छोटे निवेश और लाइसेंस फीस के रूप में ₹10,000 जमा करवाए गए, जिसके बाद लोगों को बड़ी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया गया। निवेशकों को यह भी आश्वासन दिया गया कि छह महीने बाद उनका मूल धन बिना किसी कटौती के वापस किया जा सकेगा।
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आरोप है कि जब तक निवेशक पैसे निकालने की तैयारी करते, उससे पहले ही अक्टूबर 2025 में संबंधित प्लेटफॉर्म अचानक बंद हो गया। इसके बाद निवेशकों को अपने पैसे वापस नहीं मिले और कथित फ्रॉड का खुलासा हुआ। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से करोड़ों रुपये जुटाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित निवेश नेटवर्क का प्रचार बेहद संगठित तरीके से किया गया था। आरोपियों ने Zoom मीटिंग, सोशल मीडिया कैंपेन, WhatsApp ग्रुप, होटल सेमिनार और व्यक्तिगत संपर्कों के माध्यम से लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की। शुरुआती दौर में निवेशकों को बिहारगढ़ क्षेत्र में प्लॉट देने और पोस्ट-डेटेड चेक उपलब्ध कराने जैसे वादे भी किए गए, ताकि प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता मजबूत दिखाई जा सके।
पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, लेनदेन के डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या स्थानीय स्तर पर काम कर रहे एजेंट सीधे बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल क्रिप्टो निवेश तक सीमित नहीं था, बल्कि AI-आधारित ट्रेडिंग और फॉरेक्स मार्केट में असाधारण मुनाफे का दावा कर लोगों को आकर्षित किया जा रहा था। कई निवेशकों को शुरुआती दौर में सीमित रिटर्न दिखाकर विश्वास कायम किया गया, जिसके बाद उनसे अधिक रकम निवेश करवाई गई।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में साइबर ठग पारंपरिक निवेश योजनाओं की जगह अब क्रिप्टो, AI ट्रेडिंग और डिजिटल एसेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे नेटवर्क सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों में जल्दी पैसा कमाने की मानसिकता को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिटर्न दिखाना और बड़े मुनाफे का भरोसा देना इस तरह के फ्रॉड की सबसे सामान्य रणनीति बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में निवेशकों को यह एहसास ही नहीं होता कि उनका पैसा वैध वित्तीय प्रणाली के बजाय संदिग्ध डिजिटल चैनलों में ट्रांसफर किया जा रहा है। यही वजह है कि प्लेटफॉर्म बंद होने या नेटवर्क गायब होने के बाद रकम वापस हासिल करना बेहद कठिन हो जाता है।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि देहरादून में सक्रिय यह कथित नेटवर्क देश के अन्य राज्यों में दर्ज मामलों से किस हद तक जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस मामले में जुड़े डिजिटल वॉलेट, बैंकिंग चैनल और कथित मास्टरमाइंड्स की भूमिका की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
