क्रोएशिया। यूरोपीय सार्वजनिक अभियोजक कार्यालय (European Public Prosecutor’s Office – EPPO) ने क्रोएशिया में एक बड़े सब्सिडी घोटाले का खुलासा करते हुए तीन व्यक्तियों और एक कंपनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला यूरोपीय संघ (EU) के सॉलिडैरिटी फंड से जुड़े करीब €2.5 मिलियन यानी लगभग ₹22.5 करोड़ के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त धन से संबंधित है।
EPPO के अनुसार, यह धन भूकंप के बाद पुनर्निर्माण और ऊर्जा ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए जारी किया गया था, लेकिन आरोप है कि कंपनी के मालिक ने दो अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और गलत जानकारी देकर सरकारी सब्सिडी हासिल की।
FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders
जांच में सामने आया कि आरोपी कंपनी को लगभग €2.5 मिलियन (करीब ₹22.5 करोड़) की स्वीकृति मिली थी, जिसमें से करीब €1.7 मिलियन (लगभग ₹15.3 करोड़) पहले ही जारी कर दिए गए थे। यह रकम उन कार्यों के लिए बताई गई थी, जो वास्तव में या तो हुए ही नहीं थे या पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
EPPO ने कहा कि कंपनी के मालिक ने दो अन्य पेशेवर सहयोगियों—एक निर्माण विशेषज्ञ और एक लाइसेंसधारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर—की मदद से दस्तावेजों में हेरफेर किया। इन दस्तावेजों के आधार पर EU की सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया में आवेदन किया गया और फंड हासिल कर लिया गया।
इस पूरे मामले में सबसे अहम कदम तब उठाया गया जब जांच एजेंसी ने आरोपी कंपनी के बैंक खातों में मौजूद करीब €1.5 मिलियन (लगभग ₹13.5 करोड़) की संपत्ति को फ्रीज कर दिया, ताकि कथित रूप से अवैध रूप से प्राप्त लाभ को सुरक्षित किया जा सके और उसे आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके।
EPPO ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को क्रोएशिया की अदालतों में अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा आर्थिक दंड और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी संभव है।
यह मामला उस व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें यूरोपीय संघ के फंड के दुरुपयोग और सब्सिडी घोटालों की बढ़ती घटनाओं की जांच की जा रही है। हाल के वर्षों में यूरोपीय देशों में कृषि और पुनर्निर्माण सब्सिडी से जुड़े कई घोटाले सामने आए हैं, जिससे EU फंडिंग सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।
EPPO के अनुसार, ऐसे मामलों में अक्सर फर्जी बिल, गलत निर्माण अनुमान और झूठी परियोजना रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सरकारी धन गलत हाथों में चला जाता है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक स्थानीय घोटाला नहीं, बल्कि संगठित वित्तीय अपराध की एक कड़ी हो सकता है, जो यूरोपीय संघ के विभिन्न फंडिंग प्रोजेक्ट्स को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों या नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
