लखनऊ। कॉमन नर्सिंग एंट्रेंस टेस्ट (CNET) 2026 के प्रश्नपत्र के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले एक आरोपी को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बिहार के पटना जिले के पंडारक निवासी ओम कुमार के रूप में हुई है, जिसे लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से पकड़ा गया।
यह मामला Atal Bihari Vajpayee Medical University से जुड़ा है, जहां परीक्षा नियंत्रक देवाशीष शुक्ला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि टेलीग्राम चैनल के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से पैसे वसूले जा रहे थे और परीक्षा की गोपनीयता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
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जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके साथी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी “पेपर लीक” चैनल बनाकर अभ्यर्थियों को निशाना बनाते थे। वे दावा करते थे कि उनके पास परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध है और इसके बदले डिजिटल पेमेंट के माध्यम से 2,000 से 3,000 रुपये तक की मांग की जाती थी। कई मामलों में छोटे-छोटे लेनदेन कर लोगों को ठगा गया।
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए डिजिटल साक्ष्यों में दो UPI आईडी और एक टेलीग्राम चैनल का उल्लेख किया गया था, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क केवल CNET तक सीमित नहीं था, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बनाकर ठगी करता था।
STF की पूछताछ में आरोपी ओम कुमार ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2022 से इस तरह की ठगी कर रहा है। उसके अनुसार, वह और उसके साथी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय थे। ये लोग टेलीग्राम पर “पेपर लीक” नाम से चैनल बनाते थे, जहां वे फर्जी दस्तावेज और झूठे दावे पोस्ट कर छात्रों को विश्वास में लेते थे।
आरोपी ने यह भी बताया कि परीक्षा के नजदीक आते ही वे चैनल पर अधिक सक्रिय हो जाते थे और बड़ी संख्या में छात्रों को जोड़कर उनसे पैसे ऐंठते थे। परीक्षा के दिन चैनल बंद कर दिया जाता था और फिर नया चैनल बनाकर उसी पैटर्न पर ठगी शुरू कर दी जाती थी। चूंकि राशि कम होती थी, इसलिए कई पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते थे, जिससे गिरोह लंबे समय तक सक्रिय रहा।
इस मामले में पुलिस को यह भी संदेह है कि गिरोह के पीछे एक संगठित साइबर नेटवर्क काम कर रहा है, जो विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है। STF अब आरोपी के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है ताकि उसके अन्य साथियों तक पहुंचा जा सके।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड भी बरामद किए हैं। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि चैट हिस्ट्री, बैंक डिटेल्स और टेलीग्राम गतिविधियों का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह परीक्षाओं के समय छात्रों की घबराहट और अनिश्चितता का फायदा उठाकर फर्जी “पेपर लीक” का झांसा देता था। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क ने अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह की ठगी की है।
पुलिस ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के “पेपर लीक” या “आंसर की” के दावों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचना स्रोतों पर ही विश्वास करें। STF ने संकेत दिए हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।
