नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे वित्तीय साइबर फ्रॉड और फर्जी कस्टम अधिकारियों के नाम पर हो रही ठगी के मामलों को देखते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने बड़े स्तर पर मल्टी-मॉडल जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को डिजिटल ठगी के नए तरीकों के प्रति जागरूक करना और उन्हें साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचाना है।
CBIC के अनुसार, हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें ठग खुद को भारतीय कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं और फिर उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं। ये अपराधी अधिकतर फोन कॉल, SMS, ईमेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करते हैं और खुद को सरकारी एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर कार्रवाई का भय पैदा करते हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक, ठगी का सबसे आम तरीका यह है कि लोगों को बताया जाता है कि उनके नाम पर कोई संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स, विदेशी मुद्रा, पासपोर्ट या अन्य अवैध सामग्री मिली है। इसके बाद कथित जांच, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बैंक खाते की जानकारी, OTP, डिजिटल भुगतान या भारी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है।
CBIC ने कहा कि इस तरह के साइबर अपराध अब तेजी से संगठित रूप ले रहे हैं और अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को मानसिक दबाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल के जरिए नकली कार्यालय या फर्जी पहचान पत्र दिखाकर लोगों का भरोसा जीतने का प्रयास करते हैं। कुछ मामलों में खुद को कस्टम अधिकारी, पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर डिजिटल अरेस्ट जैसा माहौल तैयार किया जाता है।
इसी खतरे को देखते हुए CBIC ने अखबारों, मोबाइल संदेशों, ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत लोगों को यह बताया जा रहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे जमा कराने, OTP साझा करने या निजी बैंकिंग जानकारी देने के लिए नहीं कहती। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करें।
CBIC ने लोगों को सलाह दी है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को कस्टम अधिकारी बताकर संपर्क करे, तो उसकी पहचान और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने या निजी वित्तीय जानकारी साझा करने से बचने को कहा गया है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि डर या घबराहट में लिया गया फैसला अक्सर लोगों को भारी आर्थिक नुकसान की ओर धकेल देता है।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब “सोशल इंजीनियरिंग” तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अपराधी लोगों की मानसिक स्थिति और डर का फायदा उठाकर उन्हें जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की कॉल आती है तो उसे तुरंत स्थानीय साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
एक Researcher at Algoritha Security के अनुसार, साइबर ठग अब सरकारी संस्थाओं की नकली वेबसाइट, स्पूफ कॉलिंग और AI-आधारित वॉयस तकनीक का भी उपयोग कर रहे हैं, जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली पहचान में फर्क करना कठिन हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
CBIC ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें और परिवार के बुजुर्गों व युवाओं को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। एजेंसी का कहना है कि सामूहिक जागरूकता और समय पर सतर्कता से ही इस तरह के बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
