बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के गुलावठी क्षेत्र से सामने आया एक हनीट्रैप मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के खतरनाक इस्तेमाल के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि जमीन विवाद के चलते एक दरोगा ने कथित तौर पर अपने ही भाई को हनीट्रैप में फंसाने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है और आरोपी उपनिरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच के अनुसार रामपुर जिले के मिलक खानम थाने में तैनात उपनिरीक्षक नीरज कुमार का अपने भाई राकेश कुमार के साथ लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी विवाद को निपटाने और भाई पर दबाव बनाने के लिए नीरज कुमार ने कथित तौर पर हनीट्रैप गिरोह से संपर्क किया। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का संचालन ओमकार सिंह नामक व्यक्ति कर रहा था, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर पूरी योजना तैयार की।
अधिकारियों के अनुसार साजिश के तहत एक युवती को राकेश कुमार के संपर्क में भेजा गया। युवती ने फोन कॉल और लगातार बातचीत के जरिए राकेश से नजदीकी बढ़ाई और धीरे-धीरे विश्वास कायम किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा तरीका सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति पर आधारित था, जिसमें पहले भरोसा बनाया जाता है और फिर उसी भरोसे का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है।
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पुलिस के मुताबिक 6 मई को युवती ने राकेश कुमार को हापुड़ घूमने के बहाने बुलाया। मुलाकात के दौरान कथित तौर पर कुछ तस्वीरें ली गईं, जिन्हें बाद में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। अगले दिन युवती ने राकेश से ₹500 लिए और उसके बाद गिरोह ने कथित तौर पर ₹20,000 की मांग शुरू कर दी। आरोप है कि रकम नहीं देने पर राकेश को रेप केस में फंसाने की धमकी दी गई।
पीड़ित ने दावा किया कि लगातार मिल रही धमकियों और दबाव के बाद उसे एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित हनीट्रैप में फंस चुका है। इसके बाद 13 मई को उसने गुलावठी पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
जांच के दौरान पुलिस ने युवती, उसके पिता और अन्य साथियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई एक थार गाड़ी और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड, चैट डिटेल्स और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं, जो इस कथित साजिश की पूरी परतें खोल सकते हैं।
मामले में आरोपी दरोगा की कथित भूमिका सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई भी तेज हो गई। पुलिस विभाग ने उपनिरीक्षक नीरज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या यह मामला केवल पारिवारिक दुश्मनी तक सीमित था।
साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि हनीट्रैप के मामलों में अब डिजिटल कम्युनिकेशन और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। “प्रख्यात साइबर क्राइम एक्सपर्ट और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह” के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपी पहले भावनात्मक या सामाजिक भरोसा कायम करते हैं और फिर निजी तस्वीरों, चैट या मुलाकातों का इस्तेमाल मानसिक दबाव और ब्लैकमेलिंग के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत विवादों में तकनीकी माध्यमों का दुरुपयोग अब गंभीर कानून-व्यवस्था चुनौती बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सोशल मीडिया और फोन के जरिए होने वाले अनजान संपर्कों से सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अचानक बढ़ती नजदीकी, निजी मुलाकात का दबाव या पैसों की मांग को गंभीरता से लेना चाहिए और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
