चंडीगढ़/मोहाली। पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े हाई-प्रोफाइल रिश्वतखोरी मामले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है। इसी केस की आगे की कार्रवाई के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सोमवार देर शाम मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय में छापेमारी की। इस दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी के रीडर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे जांच के दायरे में और विस्तार होने के संकेत मिले हैं।
हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर वित्तीय अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार नेटवर्क की जांच और गहरी होती दिख रही है।
भुल्लर रिश्वत केस की पृष्ठभूमि
यह पूरी जांच उस मामले से जुड़ी है जिसमें पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर, 2009 बैच के IPS अधिकारी, को CBI ने अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया था। उन पर एक स्क्रैप कारोबारी से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे।
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आरोपों के अनुसार, भुल्लर ने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर शिकायतकर्ता से ₹8 लाख की मांग की थी। यह राशि कथित तौर पर FIR को प्रभावित करने और कारोबारी गतिविधियों को बिना किसी बाधा के जारी रखने के बदले मांगी गई थी। इसके अलावा हर महीने ‘सेटिंग’ के नाम पर भी नियमित वसूली की बात सामने आई थी।
मार्च 2026 में एक विशेष CBI अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, रिकॉर्डेड कॉल और गवाहों के बयानों को गंभीर मानते हुए प्रारंभिक रूप से आपराधिक साजिश के संकेतों को स्वीकार किया था।
विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय में छापेमारी
CBI टीम ने मोहाली के सेक्टर 68 स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय में पहुंचकर कई घंटों तक दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। टीम ने केस से जुड़े प्रशासनिक फाइलों, फाइनेंशियल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा को खंगाला।
इसी दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी के रीडर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार, उससे कथित वित्तीय लेन-देन और रिश्वत नेटवर्क से संभावित संबंधों को लेकर गहन सवाल किए जा रहे हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छापेमारी में क्या सामग्री जब्त हुई है और हिरासत में लिए गए व्यक्ति की भूमिका किस हद तक संदिग्ध है।
₹13 लाख नकदी बरामदगी का दावा
छापेमारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि विजिलेंस विभाग से जुड़े एक मामले में करीब ₹13 लाख नकदी बरामद हुई है, जो कथित रूप से ₹20 लाख के रिश्वत केस से संबंधित बताई जा रही है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि किसी भी जांच एजेंसी ने नहीं की है। न ही CBI या विजिलेंस ब्यूरो की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
असंगत संपत्ति की जांच भी जारी
रिश्वतखोरी मामले के साथ-साथ भुल्लर और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) की जांच भी चल रही है। इसमें बैंक लेन-देन, संपत्तियों और डिजिटल वित्तीय ट्रांजैक्शंस का विश्लेषण किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियां संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और मध्यस्थों के माध्यम से हुए लेन-देन के पैटर्न को जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को समझने में जुटी हैं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ता हुआ
ताजा छापेमारी से संकेत मिलते हैं कि जांच अब केवल शुरुआती शिकायत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक बड़े कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क तक फैल सकती है। इसमें प्रशासनिक और पुलिस स्तर की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
डिजिटल फॉरेंसिक टीमें कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण कर पूरे मामले की साजिश की परतें खोलने का प्रयास कर रही हैं।
निष्कर्ष
CBI की यह कार्रवाई भुल्लर रिश्वतखोरी मामले में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, नकदी बरामदगी के दावे और एक अधिकारी के रीडर की हिरासत ने जांच को और गहराई में पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच के आधार पर इस कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
