बेंगलुरु बिटकॉइन स्कैम में ED ने 17 ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल वॉलेट्स, विदेशी ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो फ्रॉड नेटवर्क की जांच तेज की।

बिटकॉइन स्कैम पर ED का बड़ा एक्शन: बेंगलुरु में 17 ठिकानों पर छापे, क्रिप्टो फ्रॉड नेटवर्क में हड़कंप

Team The420
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में चर्चित बिटकॉइन स्कैम मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 17 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद क्रिप्टो फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर फ्रॉड और संदिग्ध डिजिटल लेनदेन के लिए किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई Srikrishna alias Sriki से जुड़े डिजिटल लेनदेन और क्रिप्टो गतिविधियों की जांच के तहत की गई है। ED की टीम उन संभावित नेटवर्क्स की गहन जांच कर रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए बड़े पैमाने पर संदिग्ध फंड ट्रांसफर किए।

जांच एजेंसी को शक है कि इस पूरे सिस्टम में केवल निवेश ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को हैक करने और अवैध रूप से क्रिप्टो एसेट्स को ट्रांसफर करने जैसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं। इसी कारण कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कंप्यूटर सिस्टम और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।

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इसी बीच मामले में एक नया मोड़ तब आया जब RR Nagar पुलिस स्टेशन में एक अलग शिकायत के आधार पर ₹18 लाख के क्रिप्टो टोकन निवेश धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। यह केस Bhavish Global Ltd – Novastro नामक कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके CEO और संस्थापक K. Sridhar पर निवेशकों को झूठे वादों के जरिए ठगने का आरोप है।

शिकायत के अनुसार, निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया था कि क्रिप्टो टोकन में निवेश करने पर कुछ ही समय में भारी रिटर्न मिलेगा। लेकिन बाद में न तो अपेक्षित लाभ मिला और न ही निवेश की गई रकम वापस की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि शुरुआत में आश्वासन दिए गए, लेकिन बाद में कंपनी के प्रतिनिधि संपर्क से बाहर हो गए।

मामले के दस्तावेजों के अनुसार, 8 मई 2024 को एक टोकन खरीद समझौता हुआ था, जिसके तहत करीब 12,50,000 NOVAS टोकन खरीदे गए, जिनकी कीमत लगभग ₹18.76 लाख बताई जा रही है। आरोप है कि यह पूरा निवेश एक सुनियोजित योजना का हिस्सा था, जिसमें टोकन की कीमत में तेजी का झूठा भरोसा दिया गया।

ED की जांच केवल इस नए केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहले से चल रहे बड़े Bitcoin scam नेटवर्क से भी जुड़ी हुई है, जिसमें Srikrishna alias Sriki का नाम लंबे समय से जांच के दायरे में है। एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क में क्रिप्टो निवेश के अलावा डिजिटल सिस्टम हैकिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड मूवमेंट जैसे गंभीर पहलू भी शामिल हो सकते हैं।

छापेमारी के दौरान ED ने कई डिजिटल उपकरण, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और संदिग्ध वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इनसे मिले डेटा का विश्लेषण कर क्रिप्टो वॉलेट्स, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन और फंड ट्रेल की कड़ी जोड़ी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ ट्रांजैक्शन ऐसे वॉलेट्स में मिले हैं जो मल्टी-लेयर ट्रांसफर सिस्टम का उपयोग कर रहे थे, जिससे असली स्रोत छिपाया जा सके।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज और ऑफशोर अकाउंट्स से भी है। शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि डिजिटल फंड्स को कई लेयर में घुमाकर ट्रैकिंग से बचाने की कोशिश की गई।

एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर सोशल मीडिया, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो टोकन स्कीम का इस्तेमाल कर निवेशकों को आकर्षित करते हैं। शुरुआत में छोटे मुनाफे का लालच देकर भरोसा बनाया जाता है और बाद में पूरी रकम गायब कर दी जाती है।

फिलहाल पुलिस और ED दोनों स्तर पर जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियों और पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या यह नेटवर्क किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़ा हो सकता है।

यह मामला एक बार फिर डिजिटल करेंसी निवेश के जोखिम और अनियंत्रित क्रिप्टो मार्केट में बढ़ते साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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