आगरा में फर्जी टोरेंट पावर बिजली बिल के सहारे कथित घोस्ट फर्म बनाकर ₹1.62 करोड़ से अधिक की GST चोरी और फर्जी ITC लेने का मामला सामने आया है।

कागजों में करोड़ों का कारोबार, जमीनी स्तर पर दुकान तक नहीं: बरेली में फर्जी GST बिलिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा

Team The420
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बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली मंडल में फर्जी फर्मों और कागजी कारोबार के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हड़पने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद राज्य कर विभाग और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में सामने आया है कि कई ऐसी फर्में करोड़ों रुपये का कारोबार दिखा रही थीं, जिनका जमीन पर कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। अब तक इस पूरे नेटवर्क से जुड़े 22 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 13 आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

राज्य कर विभाग के अनुसार फर्जी GST पंजीकरण, कागजी बिलिंग और काल्पनिक खरीद-बिक्री के जरिए करोड़ों रुपये की ITC पास कराने का खेल लंबे समय से चल रहा था। जांच में यह सामने आया कि कई फर्मों ने बिना किसी वास्तविक माल सप्लाई के केवल बिल जारी किए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर टैक्स क्रेडिट क्लेम किया गया। इससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा।

अधिकारियों के मुताबिक सबसे अधिक 18 मामले अकेले बरेली जिले में सामने आए हैं, जबकि पीलीभीत और शाहजहांपुर में भी फर्जी बिलिंग नेटवर्क सक्रिय पाया गया। विभागीय जांच में कई ऐसे पते मिले जहां फर्में पंजीकृत थीं, लेकिन मौके पर या तो कोई दुकान नहीं थी या छोटे कमरों से करोड़ों रुपये के कारोबार का दावा किया जा रहा था। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई फर्मों के संचालन के संकेत भी मिले हैं।

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जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर GST पंजीकरण कराया जाता था, फिर अलग-अलग फर्मों के बीच कागजी खरीद-बिक्री दिखाकर बिलों का आदान-प्रदान किया जाता था। इसके बाद संबंधित कारोबारी उन्हीं बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर लेते थे। बदले में कमीशन के तौर पर मोटी रकम वसूली जाती थी।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फर्जी ITC के इस खेल में तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों की भी भूमिका सामने आई है। जांच में पता चला कि कई स्तरों पर बिलिंग चेन बनाई जाती थी ताकि वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी और परिवहन दस्तावेजों की जांच में कई संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं।

जांच के दौरान जनवरी 2026 में सामने आए एक मामले में कांधरपुर निवासी नितेश कुमार के खिलाफ करीब ₹6.8 करोड़ की GST चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की ITC पास कराई गई। वहीं फरवरी 2026 में सामने आए दूसरे मामले में तीन फर्मों द्वारा करीब ₹10.56 करोड़ की ITC हड़पने का आरोप लगा। जांच में पता चला कि “आकाश ट्रेडर्स” नामक फर्म जिस पते पर पंजीकृत थी, वहां वास्तव में कोई व्यापारिक गतिविधि मौजूद ही नहीं थी।

अधिकारियों के अनुसार फर्जी फर्मों के नेटवर्क में “महाकाल ट्रेडर्स”, “श्याम ट्रेडर्स” और “राधे ट्रेडर्स” जैसी कई अन्य फर्मों के साथ भी करोड़ों रुपये के कागजी लेनदेन दिखाए गए। अब विशेष जांच टीम (SIT) पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेयरिंग और बैंकिंग ट्रेल की जांच कर रही है।

राज्य कर विभाग का कहना है कि जिन कारोबारियों ने फर्जी बिलों के आधार पर ITC क्लेम किया है, उनसे भी पूछताछ की जा रही है। विभाग ने व्यापारियों को चेतावनी दी है कि किसी भी फर्म से कारोबार करने से पहले उसके GST नंबर, वास्तविक गतिविधियों और पते का सत्यापन अवश्य करें, क्योंकि संदिग्ध लेनदेन में शामिल पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

साइबर और वित्तीय अपराध मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम और ऑनलाइन बिलिंग प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग अब संगठित आर्थिक अपराध का नया माध्यम बनता जा रहा है। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार फर्जी ITC नेटवर्क केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठित वित्तीय अपराध का हिस्सा बन चुका है, जिसमें डिजिटल दस्तावेज, शेल कंपनियां और बैंकिंग चैनलों का योजनाबद्ध इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि कारोबारी संस्थानों को KYC सत्यापन, सप्लाई चेन ऑडिट और डिजिटल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग को मजबूत करना होगा, तभी ऐसे नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

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