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फर्जी आधार और नकली बैनामे के सहारे जमीन हड़पने का खेल बेनकाब, चार आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में जमीन से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र और कथित तौर पर तैयार कराए गए फर्जी बैनामे के जरिए एक महिला की जमीन पर अवैध कब्जा हासिल करने की साजिश रची। मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क, दस्तावेजों की तैयारी में शामिल लोगों और संभावित आर्थिक लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

मामला बदायूं के दातागंज क्षेत्र का है, जहां एक महिला ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उसकी जमीन को हड़पने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से फर्जी कागजात तैयार कराए। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने एक दूसरी महिला को वास्तविक स्वामित्वधारी के रूप में प्रस्तुत किया और उसके नाम से कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इसके बाद उसी पहचान का इस्तेमाल करते हुए जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार कराए गए और स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

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प्राथमिक जांच में सामने आया कि कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर जमीन का बैनामा कराया गया, जिससे वास्तविक स्वामित्व को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दस्तावेजों, पहचान संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई।

पुलिस के अनुसार, लंबे समय से वांछित चल रहे चार आरोपियों को दातागंज कस्बे के बरेली तिराहा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कदीर खां, मुस्ताक खान, लालाराम और प्रेमपाल के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।

जांचकर्ताओं का मानना है कि यह केवल एक साधारण संपत्ति विवाद का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसमें सुनियोजित दस्तावेजी हेरफेर और पहचान संबंधी धोखाधड़ी के तत्व भी शामिल हो सकते हैं। इसी कारण अब यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी पेशेवर नेटवर्क की सहायता ली गई थी।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां भूमि अभिलेख, राजस्व रिकॉर्ड, पंजीकरण दस्तावेज और डिजिटल पहचान संबंधी विवरणों का मिलान कर रही हैं। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इसी प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल कर अन्य लोगों की संपत्तियों को निशाना तो नहीं बनाया गया। यदि जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

संपत्ति धोखाधड़ी के मामलों में विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी पहचान पत्र, नकली स्वामित्व रिकॉर्ड और जाली दस्तावेजों का उपयोग कर जमीन या मकान हड़पने की घटनाएं लगातार अधिक जटिल होती जा रही हैं। कई मामलों में अपराधी दस्तावेजों को इस तरह तैयार करते हैं कि पहली नजर में वे पूरी तरह वैध प्रतीत हों, जिससे आम नागरिक आसानी से भ्रमित हो सकते हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आज के समय में आर्थिक अपराध और संपत्ति धोखाधड़ी में डिजिटल पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार अपराधी अक्सर फर्जी पहचान दस्तावेज, जाली रिकॉर्ड और सामाजिक विश्वास का फायदा उठाकर लोगों की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी भूमि या मकान के लेन-देन से पहले संबंधित रिकॉर्ड, स्वामित्व दस्तावेज, पंजीकरण विवरण और पहचान पत्रों का स्वतंत्र सत्यापन अवश्य कराया जाना चाहिए।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विवेचना जारी है और अभी कई पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित साजिश का दायरा कितना बड़ा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या आरोपियों ने इसी प्रकार की अन्य संपत्ति धोखाधड़ी को भी अंजाम दिया है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में इस पूरे नेटवर्क, दस्तावेजी हेरफेर की प्रक्रिया और संभावित आर्थिक लाभ से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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