आंध्र प्रदेश के बापटला जिले में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और उससे ₹26.5 लाख की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला मार्च में शुरू हुआ था जब चिराला क्षेत्र के कोंथापेटा गांव निवासी के. मोहन राव को आरोपियों ने फोन और ऑनलाइन माध्यम से संपर्क किया। उन्होंने खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ एक गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज है।
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आरोपियों ने पीड़ित को लगातार धमकाया और कहा कि यदि उसने जांच में सहयोग नहीं किया तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसी डर और मानसिक दबाव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।
शिकायत मिलने के बाद चिराला II टाउन पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान साइबर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गांडीबोयिना नील कुमार (29), नागला प्रदीप कुमार उर्फ अर्जुन राव (24) और बोंदलापु गोविंद (36) के रूप में हुई है। तीनों ही आरोपी विशाखापट्टनम के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराता था। वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके खिलाफ गंभीर वित्तीय अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग केस चल रहा है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करना जरूरी है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे और अलग-अलग डिजिटल उपकरणों और मोबाइल नेटवर्क का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाते थे। पुलिस ने उनके पास से नकदी, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासपोर्ट, मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव बरामद किए हैं।
बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि आरोपी डिजिटल स्तर पर संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे और विभिन्न उपकरणों का इस्तेमाल कर अपने ट्रांजैक्शन और संचार को छिपाने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों में अपराधी मानसिक दबाव और डर का उपयोग कर लोगों को निशाना बनाते हैं। वे पीड़ित को यह महसूस कराते हैं कि वे तत्काल गिरफ्तारी के खतरे में हैं, जिससे वे बिना जांच किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
अधिकारियों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि कोई भी पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने या गिरफ्तारी से बचने के लिए धन जमा करने की मांग नहीं करती। ऐसे किसी भी कॉल को तुरंत संदिग्ध मानकर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करना चाहिए।
पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के पीछे और भी लोग शामिल हो सकते हैं और यह किसी बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इस दिशा में आगे की जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया है और कुल कितनी राशि की ठगी की गई है।
