विशाखापत्तनम। देश में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधों का दायरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। आंध्र प्रदेश से सामने आए ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर ठगी अब एक गंभीर और संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB-2024) के अनुसार राज्य में साइबर अपराध के मामलों में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
2023 में जहां 2,341 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,528 तक पहुंच गई। इन मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा फ्रॉड यानी धोखाधड़ी का रहा, जो कुल मामलों के 50 प्रतिशत से भी अधिक है। इसके अलावा राजनीतिक कारणों से जुड़े 272 मामले, व्यक्तिगत रंजिश के 141 मामले, वसूली के 81 मामले और यौन शोषण से जुड़े 63 मामले भी दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में अकेले साइबर अपराधों से राज्य में लगभग ₹970 करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे भी अधिक हो सकता है क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
साइबर अपराधों के स्वरूप में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। पहले जहां फिशिंग और OTP फ्रॉड जैसे मामले अधिक थे, अब निवेश योजनाओं के नाम पर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। इन मामलों में अपराधी खुद को सरकारी एजेंसी या जांच अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एक चिंताजनक पहलू यह भी है कि इन ठगी मामलों में अधिकांश पीड़ित शिक्षित और जागरूक वर्ग से आते हैं। आसान और आकर्षक रिटर्न के लालच में लोग बड़ी रकम निवेश कर देते हैं और बाद में ठगी का शिकार हो जाते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 70 प्रतिशत निवेश धोखाधड़ी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया से संचालित नेटवर्क के जरिए की जाती है। इन गिरोहों में कई बार भारत के युवाओं को भी नौकरी के बहाने फंसाकर शामिल कर लिया जाता है।
इस विषय पर साइबर सुरक्षा से जुड़े एक अनुसंधानकर्ता का कहना है कि “डिजिटल अपराधियों ने अब तकनीक और मनोविज्ञान दोनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। वे सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को मानसिक दबाव में लेकर उनकी गाढ़ी कमाई तक पहुंच बना रहे हैं।”
वहीं साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट और निवेश फ्रॉड जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि अपराधी अब तकनीक से ज्यादा मानव व्यवहार को निशाना बना रहे हैं। लोग डर और लालच में आकर अपने बैंक खाते और ओटीपी साझा कर देते हैं, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।”
राज्य में 2022 से 2024 के बीच कुल 7,210 साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार हर महीने औसतन 200 से 300 मामले सामने आ रहे हैं। वहीं वर्ष 2021 में जहां नुकसान ₹34 करोड़ के आसपास था, वह 2024 में बढ़कर लगभग ₹974 करोड़ तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी तेजी से अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। कई मामलों में बैंक और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
सरकारी स्तर पर साइबर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और हेल्पलाइन नंबर 1930 को सक्रिय किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आम नागरिक डिजिटल सतर्कता नहीं अपनाएंगे, तब तक इस बढ़ते खतरे पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल रहेगा।
