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AMU कर्मचारियों से ₹300–400 करोड़ की ठगी: फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े निवेश घोटाले का खुलासा, यूपी में मचा हड़कंप

Team The420
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अलीगढ़, उत्तर प्रदेश। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कर्मचारियों को निशाना बनाकर एक बड़े निवेश घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें अनुमानित ठगी की रकम ₹300 से ₹400 करोड़ बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद कर्मचारियों और निवेशकों में भारी दहशत फैल गई है।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला कथित तौर पर तीन फर्जी निवेश संस्थाओं—शाहिना फाइनेंशियल एडवाइजर, साइना हॉलीडे और सायना इन्वेस्टमेंट—से जुड़ा हुआ है। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने खुद को वैध वित्तीय सलाहकार और निवेश फर्म बताकर AMU कर्मचारियों को आकर्षक रिटर्न का लालच दिया और धीरे-धीरे बड़ी रकम इकट्ठा की।

मामले में थाना सिविल लाइन में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन फर्मों के जरिए सुनियोजित तरीके से पोंजी स्कीम जैसी संरचना बनाई गई, जिसमें शुरुआती निवेशकों को छोटे-छोटे रिटर्न देकर भरोसा जीतने की कोशिश की गई।

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सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मुख्य आरोपियों के रूप में जुनैद, अहमद और दीपक कुमार के नाम सामने आए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने AMU कर्मचारियों सहित कई लोगों से निवेश के नाम पर भारी रकम वसूली।

शुरुआती जांच में यह पैटर्न सामने आया है कि निवेशकों को शुरुआत में भुगतान किया गया, जिससे स्कीम पर भरोसा बढ़ा, लेकिन कुछ समय बाद भुगतान बंद कर दिया गया और आरोपी संपर्क से बाहर हो गए। इसके बाद पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ।

एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता साजिद अली ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले के दो मुख्य आरोपी—जुनैद और दीपक—देश छोड़कर फरार हो चुके हैं। उनके अनुसार, यह फर्जी कंपनियां अलीगढ़ के मरिस रोड स्थित एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से संचालित हो रही थीं, जिससे इन्हें वैध व्यवसाय का आभास मिलता रहा।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई स्तरों पर फंड घुमाकर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और संपत्ति रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को अलग-अलग खातों और माध्यमों से घुमाकर अन्य स्थानों पर ट्रांसफर किया गया। इसी वजह से जांच को वित्तीय अपराध शाखा और साइबर सेल के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मामले के सामने आने के बाद AMU कर्मचारियों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई है। कई पीड़ितों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और अपनी जमा पूंजी की वापसी की मांग की है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की योजनाएं अक्सर निश्चित और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर लोगों को फंसाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वैधता, पंजीकरण और नियामक मंजूरी की जांच बेहद जरूरी है।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी तरह सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह की धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।

फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किस तरह संगठित वित्तीय फ्रॉड शिक्षित वर्ग को भी निशाना बना रहे हैं।

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