आजमगढ़ साइबर ठगी मामले में आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित रूप से पेट्रोल पंप और जन सेवा केंद्रों के जरिए ठगी की रकम नकद कराई।

साइबर ठगी नेटवर्क को बड़ा झटका: बैंक खातों की सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

Team The420
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अलीगढ़ में साइबर अपराधों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो पूरे देश में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर उनके अपराधों की वित्तीय रीढ़ तैयार कर रहा था। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो संगठित तरीके से फर्जी फर्म खातों की सप्लाई कर रहे थे।

जांच में सामने आया है कि आरोपी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छोटी दुकानें खोलकर उन्हें फर्म के रूप में पंजीकृत कराते थे। इसके बाद ये लोग बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके नाम पर करंट बैंक अकाउंट खुलवाते थे। इन खाताधारकों को मामूली रकम ₹5,000 से ₹10,000 तक दी जाती थी, जबकि वही बैंक खाते साइबर ठगों को ₹4 से ₹5 लाख तक में बेच दिए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 252 फर्म आधारित बैंक खातों का विवरण बरामद किया गया है। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में चल रही ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं, नकली ट्रेडिंग स्कीम और डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में किया जा रहा था।

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यह मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय व्यक्ति ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसे सोशल मीडिया पर “डबल मनी” स्कीम के नाम पर ठगा गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि इंस्टाग्राम पर एक ट्रेडिंग ग्रुप के जरिए उसे भारी मुनाफे का लालच देकर कुल ₹1.04 लाख की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई।

तकनीकी निगरानी और वित्तीय ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अनीस यादव (कानपुर देहात), दीपक (बुलंदशहर) और रिंकू सिंह (हापुड़) शामिल हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय उपकरण भी बरामद किए, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। इनमें एक लैपटॉप, 27 कीपैड मोबाइल फोन, 7 स्मार्टफोन, 46 चेकबुक, 5 पासबुक, 27 स्टांप मुहर, एक पेन ड्राइव, 3 स्वाइप मशीन, 13 एटीएम कार्ड और 55 क्यूआर कोड शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था, जिसमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल और उत्तर प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। अब तक 13 साइबर अपराध शिकायतें राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर इन आरोपियों से जुड़ी पाई गई हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सीधे तौर पर ऑनलाइन ठगी नहीं करते थे, बल्कि “म्यूल अकाउंट” यानी ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराते थे जिनके जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग चैनलों में घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाई जाती थी।

इस कार्रवाई से यह साफ हुआ है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक संगठित वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा है जो अपराधियों को सुरक्षित लेन-देन का माध्यम उपलब्ध कराता है।

जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा हो सकता है, जो लगातार ऐसे खातों की सप्लाई कर रहा है। फिलहाल आगे की जांच जारी है और बैंकिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि पैसे के अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचा जा सके।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क डिजिटल अपराधों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, क्योंकि ये सीधे अपराध को अंजाम नहीं देते, लेकिन पूरे फ्रॉड सिस्टम को वित्तीय सहारा प्रदान करते हैं।

पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही वित्तीय संस्थानों के सहयोग से संदिग्ध खातों को चिन्हित कर फ्रीज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि डिजिटल अपराधों की पूरी सप्लाई चेन को खत्म किया जा सके।

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