अलीगढ़ में नर्सिंग शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें एसीएन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस पर छात्रों से धोखाधड़ी और फर्जी मान्यता के नाम पर लाखों रुपये वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि प्रवेश के समय उन्हें इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से मान्यता प्राप्त कोर्स का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में जारी की गई डिग्री में State Nursing Council (SNC) का अप्रूवल सामने आया, जिससे उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
इस मामले को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने अनूपशहर-कासिमपुर रोड स्थित एसीएन कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन किया और एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की। छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज में ANM, GNM और BSc नर्सिंग जैसे कोर्स बिना INC मान्यता के संचालित किए जा रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनसे प्रवेश के समय INC अप्रूवल के नाम पर भारी फीस ली गई, लेकिन बाद में जब डिग्री मिली तो उसमें SNC मान्यता दर्ज थी। इस अंतर ने छात्रों को यह महसूस कराया कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर भी लगभग ₹40,000 तक की अतिरिक्त वसूली की गई।
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ABVP पदाधिकारियों ने कहा कि यह मामला केवल मान्यता का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। उनके अनुसार, एक ही परिसर में फार्मेसी, इंजीनियरिंग और पैरामेडिकल जैसे कई कोर्स बिना स्पष्ट मानकों के संचालित किए जा रहे हैं, जो गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
छात्रों की मांग है कि प्रभावित सत्र 2024-25 और 2025-26 के सभी विद्यार्थियों को INC मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र या समकक्ष वैध डिग्री उपलब्ध कराई जाए, साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कॉलेज की मान्यता की समीक्षा की जाए।
वहीं, एसीएन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक शकील अहमद ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कॉलेज पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच पहले ही जिलाधिकारी स्तर पर कराई जा चुकी है। उनके अनुसार SNC की डिग्री भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत मान्य है और छात्र इसका उपयोग देश-विदेश में कर सकते हैं।
हालांकि, छात्रों का कहना है कि उन्हें दाखिले के समय जो जानकारी दी गई थी, वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। इसी कारण वे लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
इस विवाद ने नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था और निजी संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नर्सिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में मान्यता से जुड़े किसी भी भ्रम या अनियमितता का सीधा असर छात्रों के करियर और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच जारी रखने की बात कही है और छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। इस मामले के और आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि छात्र संगठन लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और आंदोलन तेज कर रहे हैं।
