Google Threat Intelligence रिपोर्ट में Generative AI से बने Zero-Day Exploit, 2FA बायपास और AI-संचालित मैलवेयर का खुलासा।

AI से बने Zero-Day Exploit ने बढ़ाई साइबर सुरक्षा चिंता: Google रिपोर्ट में Generative AI आधारित खतरनाक हमलों का खुलासा

Team The420
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Google Threat Intelligence Group (GTIG) की एक नई रिपोर्ट ने साइबर सुरक्षा दुनिया में चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अब साइबर अपराधी जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से न केवल कमजोरियां खोज रहे हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक Zero-Day Exploit में बदलकर हमलों को अंजाम भी दे रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एक साइबर आपराधिक समूह ने AI की मदद से एक ऐसा Python आधारित exploit विकसित किया है, जो एक लोकप्रिय ओपन-सोर्स वेब एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम में मौजूद Two-Factor Authentication (2FA) को बायपास करने में सक्षम है। यह घटना इस बात का संकेत है कि AI अब केवल सहायक टूल नहीं रहा, बल्कि सीधे साइबर हमलों का हिस्सा बन चुका है।

AI-जनरेटेड Zero-Day और लॉजिक-आधारित कमजोरी

GTIG की Q2 2026 रिपोर्ट बताती है कि यह हमला पारंपरिक तकनीकी कमजोरियों जैसे मेमोरी करप्शन या इनपुट वैलिडेशन फेलियर पर आधारित नहीं था, बल्कि यह एक “लॉजिक वल्नरेबिलिटी” थी। यानी सिस्टम के डिजाइन में मौजूद भरोसे की गलत धारणा (trust assumption) का फायदा उठाया गया।

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ऐसी कमजोरियां पारंपरिक सुरक्षा टूल्स जैसे SAST (Static Application Security Testing) या फजिंग से पकड़ना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि ये कोड की संरचना नहीं बल्कि सिस्टम के लॉजिक पर आधारित होती हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस exploit में AI के उपयोग के संकेत मिले—जैसे अत्यधिक व्यवस्थित Python कोड, शैक्षणिक डॉक्यूमेंटेशन जैसा लेखन और गलत तरीके से जनरेट किया गया CVSS स्कोर।

AI का बढ़ता साइबर अपराध में उपयोग

  • GTIG ने कई APT (Advanced Persistent Threat) ग्रुप्स की गतिविधियों का भी उल्लेख किया है, जो AI का इस्तेमाल हमलों को तेज करने के लिए कर रहे हैं।
  • UNC2814 ने AI मॉडल्स को “persona-based prompting” के जरिए ऐसा निर्देश दिया कि वे वरिष्ठ सुरक्षा विशेषज्ञ की तरह फर्मवेयर का विश्लेषण करें।
  • APT45 हजारों ऑटोमेटेड प्रॉम्प्ट्स के जरिए CVE डेटाबेस का विश्लेषण कर संभावित एक्सप्लॉइट तैयार करने में जुटा रहा।
  • APT27 पर आरोप है कि उसने AI की मदद से ऐसे सिस्टम बनाए जो हमलों के स्रोत को छिपाने के लिए रूटिंग और ओबफस्केशन तकनीक का उपयोग करते हैं।

PROMPTSPY: AI से चलने वाला खतरनाक मोबाइल मैलवेयर

सबसे गंभीर खुलासों में से एक Android मैलवेयर PROMPTSPY है, जो सीधे AI API से जुड़कर काम करता है। इसका “GeminiAutomationAgent” मॉड्यूल मोबाइल स्क्रीन को स्कैन कर AI को डेटा भेजता है, और फिर AI उसे कमांड में बदल देता है—जैसे क्लिक, स्वाइप और नेविगेशन।

यह मैलवेयर यूजर की जानकारी के बिना फोन को नियंत्रित कर सकता है, बायोमेट्रिक डेटा चुरा सकता है और खुद को हटाने से रोकने के लिए छिपे हुए ओवरले भी बना सकता है। Google ने इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बंद कर दिया है और कहा है कि यह ऐप्स आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं थे।

सप्लाई चेन और डेवलपमेंट सिस्टम पर हमला

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब साइबर अपराधी सिर्फ सिस्टम नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन को भी निशाना बना रहे हैं। GitHub रिपॉजिटरी और CI/CD पाइपलाइनों में घुसपैठ कर API की, क्लाउड क्रेडेंशियल और टोकन चुराए जा रहे हैं।

इसके बाद इन डेटा का उपयोग बड़े पैमाने पर एंटरप्राइज सिस्टम्स में घुसपैठ और डेटा चोरी के लिए किया जाता है।

डिफेंस में भी AI का इस्तेमाल

Google ने जवाबी कदम के तौर पर AI आधारित सुरक्षा सिस्टम विकसित किए हैं, जो कमजोरियों की पहचान और ऑटोमैटिक पैचिंग में मदद करते हैं। इसके अलावा Google Play Protect जैसे सिस्टम अब ज्ञात मैलवेयर को सक्रिय रूप से ब्लॉक कर रहे हैं।

निष्कर्ष और चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब साइबर अपराध का नया इंजन बन चुका है। हमलावर इसे तेजी से कमजोरियां खोजने, मैलवेयर बनाने और सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में AI आधारित साइबर हमलों की संख्या और जटिलता दोनों में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे संगठनों को अपने सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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