अहमदाबाद में गरीब और श्रमिक वर्ग के नाम पर 100 से अधिक बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी में इस्तेमाल करने वाले म्यूल अकाउंट रैकेट का खुलासा।

गरीबों के नाम पर 100+ बैंक अकाउंट खोलकर साइबर ठगी का जाल: अहमदाबाद में बड़ा म्यूल अकाउंट रैकेट उजागर

Team The420
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अहमदाबाद में साइबर अपराध से जुड़ा एक बड़ा म्यूल अकाउंट रैकेट सामने आया है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों के नाम पर 100 से अधिक बैंक खाते खुलवाकर उन्हें देशभर में ऑनलाइन ठगी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा अहमदाबाद ज़ोन-1 LCB की कार्रवाई के बाद हुआ है, जहां एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया जबकि पांच अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

पुलिस जांच के अनुसार यह गिरोह पिछले लगभग 14 महीनों से सक्रिय था और बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। गैंग के सदस्य गरीब और श्रमिक वर्ग के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक अकाउंट खुलवाते थे। इसके बाद बैंक से मिलने वाली किट—जिसमें एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक शामिल होती थी—आरोपी अपने पास रख लेते थे और इन्हें आगे साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।

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गिरफ्तार आरोपी की पहचान नीरव शाह के रूप में हुई है, जिसे नारणपुरा इलाके से पकड़ा गया। पुलिस ने उसके पास से तीन एटीएम कार्ड, एक बैंक पासबुक और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि वह और उसका साथी विशाल कोटक इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालनकर्ता थे, जो मिलकर खातों की व्यवस्था और वितरण का काम संभालते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि यह गैंग स्थानीय श्रमिक इलाकों में जाकर ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जिन्हें तुरंत पैसे की जरूरत होती थी। उन्हें छोटी रकम का लालच देकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। एक बार खाता सक्रिय होने के बाद उसकी पूरी बैंकिंग किट गैंग द्वारा एकत्र कर ली जाती थी और फिर अलग-अलग बिचौलियों के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी।

इस नेटवर्क में अन्य कई लोग भी शामिल पाए गए हैं, जिनमें देव मोढेरा, पटेलभाई, गोपाल पंचाल और विक्की जैसे नाम सामने आए हैं। ये सभी लोग खातों के संचालन, सिम कार्ड की व्यवस्था और न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने जैसे कामों में सक्रिय थे। पुलिस का कहना है कि यह पूरा सिस्टम बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था ताकि किसी भी लेन-देन का सीधा संबंध असली साइबर अपराधियों तक न पहुंचे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन बैंक खातों का उपयोग देश के कई राज्यों में हुई ऑनलाइन ठगी की घटनाओं में किया गया है। कई साइबर क्राइम मामलों में इन खातों के जरिए पैसा ट्रांसफर हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल स्थानीय नहीं बल्कि एक इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क है।

अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा रैकेट एक तरह से “ह्यूमन सप्लाई चेन” की तरह काम करता था, जिसमें गरीब लोगों की पहचान का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाई जाती थी। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगों को बेच दिया जाता था, जो इन्हें फर्जी निवेश, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और डिजिटल पेमेंट धोखाधड़ी में उपयोग करते थे।

फिलहाल नारणपुरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और फरार आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल अकाउंट्स साइबर अपराध की सबसे बड़ी कड़ी बन चुके हैं और ऐसे नेटवर्क लगातार डिजिटल फ्रॉड को बढ़ावा दे रहे हैं। यह मामला इस बात का संकेत है कि बैंकिंग सिस्टम में KYC वेरिफिकेशन और अकाउंट ओनरशिप की जांच को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

डिजिटल लेन-देन के बढ़ते उपयोग के बीच इस तरह के रैकेट उपभोक्ताओं और वित्तीय संस्थानों दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। पुलिस और साइबर एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय ट्रेल, डिजिटल लिंक और अंतरराज्यीय कनेक्शन की गहन जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितनी बड़ी राशि की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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