आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में जीएसटी चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी फर्म के जरिए ₹1.63 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लेने का खुलासा हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने लगभग ₹80 करोड़ के फर्जी बिल तैयार किए थे, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने एक स्क्रैप कारोबारी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 1 दिसंबर 2025 को राज्य कर विभाग के खंड छह के अधिकारी अमीर चंद ने लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराया गया था और बाद में बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया।
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पुलिस जांच में सामने आया कि जिस पते पर “एसके संस” नामक फर्म का पंजीकरण कराया गया था, वहां वास्तविक रूप से कोई व्यापारिक गतिविधि मौजूद नहीं थी। मौके पर न तो कोई कार्यालय मिला और न ही कोई कारोबारी संचालन के सबूत पाए गए। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह फर्म केवल कागजों पर बनाई गई थी ताकि फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स लाभ लिया जा सके।
इस मामले में पुलिस ने कृष्णा कॉलोनी (जीवनी मंडी) निवासी अमन डंग, प्रतीक्षा एन्क्लेव निवासी सौरभ सिंह और प्रेम विहार निवासी राम अवतार शर्मा को गिरफ्तार किया है। एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी अलग-अलग स्तर पर इस फर्जीवाड़े में शामिल थे और उन्होंने सुनियोजित तरीके से पूरा नेटवर्क तैयार किया था।
जांच के अनुसार, राम अवतार शर्मा ने फर्जी फर्म खोलने की पूरी योजना तैयार की थी। इसके लिए उसने एक मजदूर सगीर खान के दस्तावेजों का उपयोग किया, जिसे फर्म का मालिक दिखाया गया। उसी मजदूर के आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवाया गया और उसके नाम पर सिम कार्ड भी जारी कराया गया, ताकि पूरी गतिविधि को वास्तविक दिखाया जा सके।
आरोपियों ने फर्म को “एसके संस” नाम से रजिस्टर कराया और इसका पता जगनपुर बेला, खेलगांव, दयालबाग दिखाया गया। दस्तावेजों में किरायानामा और बिजली बिल भी लगाए गए थे, जो जांच में पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसी फर्जी पहचान के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराया गया और बड़े पैमाने पर बिलिंग की गई।
पुलिस के अनुसार, इस फर्जी फर्म के जरिए करीब ₹80 करोड़ के बिल तैयार किए गए थे, जिनका उपयोग इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग में किया गया। यह पूरा नेटवर्क कागजों पर व्यापार दिखाकर टैक्स सिस्टम को धोखा देने के लिए तैयार किया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी कंपनियां बनाकर टैक्स सिस्टम का दुरुपयोग किया जाता है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अलग-अलग भूमिकाएं तय कर रखी थीं, ताकि किसी एक व्यक्ति पर पूरा शक न जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी फ्रॉड के ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा फर्जी दस्तावेजों और पहचान का दुरुपयोग है, जिसमें आम लोगों के नाम पर खाते और कंपनियां बनाकर सिस्टम को गुमराह किया जाता है।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है और उनके बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य फर्मों से जुड़े लिंक की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है और पूरे रैकेट का विस्तार सामने आने की संभावना है।
