केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि ड्रग सिंडिकेट ड्रोन, एन्क्रिप्टेड ऐप्स, VPN और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नकली और नशीली दवाओं का रैकेट पहुंचा ईडी तक: आगरा के तीन बड़े मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई

Team The420
4 Min Read

आगरा में नकली, नशीली और अवैध दवाओं के बड़े नेटवर्क की जांच अब एक नए स्तर पर पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस पूरे मामले में पहली बार औपचारिक रूप से एंट्री करते हुए वर्ष 2025 में दर्ज तीन आपराधिक मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस कदम के बाद जांच के दायरे में अब वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल भी शामिल हो गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने कोतवाली और एमएम गेट थाने में दर्ज तीन अलग-अलग एफआईआर की पूरी केस फाइल मांगी है। ये सभी मामले आगरा और लखनऊ के बीच फैले एक संभावित अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिस पर नकली और नियंत्रित दवाओं के बड़े पैमाने पर निर्माण और वितरण का आरोप है।

इन मामलों में एक गंभीर आरोप यह भी है कि एक आरोपी ने एसटीएफ इंस्पेक्टर को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने का प्रयास किया था, जिसके बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया।

रिकॉर्ड के अनुसार, पहला मामला 25 अगस्त 2025 को एमएम गेट थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें यूनुस, वारिश, विक्की कुमार, सुभाष कुमार, हिमांशु और फरहान समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। इस दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाएं जब्त की गई थीं।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

दूसरा मामला 28 अगस्त 2025 को दर्ज हुआ, जिसमें हे मां मेडिको के हिमांशु अग्रवाल, मीनाक्षी फार्मा के राजा उर्फ ए.के. राना, लखनऊ की कुमार न्यू बाबा फार्मा के विक्की और पार्वती ट्रेडर्स के सुभाष कुमार शामिल हैं। इसी मामले में आरोप है कि हिमांशु अग्रवाल ने जांच के दौरान एसटीएफ अधिकारी को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने की कोशिश की थी, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया और मामला भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दर्ज किया गया।

तीसरा मामला कोतवाली थाने में संजय बंसल, उनके बेटे सोहित बंसल और भाई मुकेश बंसल के खिलाफ दर्ज किया गया था, जिसमें अवैध दवा सप्लाई चेन से जुड़े होने के आरोप सामने आए थे।

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जो हर महीने करोड़ों रुपये की नकली दवाएं बाजार में खपा रहा था। इनमें जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल थीं, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क में छोटे मेडिकल स्टोर कर्मचारियों से लेकर बड़े थोक व्यापारियों तक की भूमिका सामने आई है, जिन्होंने अवैध कारोबार के जरिए अचानक बड़ी संपत्ति अर्जित की है। अब ईडी की एंट्री के बाद पूरा मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच के दायरे में आ सकता है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध निवेश पैटर्न की जांच करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, ईडी बैंक खातों, संपत्ति रिकॉर्ड और व्यापारिक नेटवर्क की गहन जांच कर सकती है, जिससे इस सिंडिकेट के कई और चेहरे सामने आने की संभावना है। ईडी मुख्यालय ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय को पत्र भेजकर तीनों मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसे तैयार किया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे वित्तीय जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला एक बड़े अंतरराज्यीय या बहु-राज्यीय दवा रैकेट का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला नकली दवा निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच बढ़ते गठजोड़ को उजागर करता है, जहां अवैध कमाई को जटिल कारोबारी ढांचों के जरिए छिपाया जा रहा है।

फिलहाल ईडी की प्रारंभिक समीक्षा के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना है, जिससे यह जांच और भी व्यापक हो सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article