नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (AGMUT) कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर प्रक्रिया और सख्त कर दी है। गृह मंत्रालय ने नए निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब किसी भी अधिकारी को पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने से पहले मंत्रालय से अनिवार्य विजिलेंस क्लियरेंस प्राप्त करना होगा। मंत्रालय ने सभी संबंधित प्रशासनिक इकाइयों को निर्देश दिया है कि आवश्यक मंजूरी के बिना किसी भी प्रकार के पेंशन संबंधी भुगतान की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश AGMUT कैडर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होंगे। इनमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, पुडुचेरी, चंडीगढ़, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव सहित अन्य प्रशासनिक इकाइयां शामिल हैं। दिल्ली पुलिस में कार्यरत AGMUT कैडर के IPS अधिकारियों को देखते हुए संबंधित पुलिस प्रशासन को भी इस संबंध में सूचित किया गया है।
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मंत्रालय के अनुसार यह कदम अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए प्रावधान के तहत किसी भी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से पहले उसकी सतर्कता स्थिति की व्यापक जांच की जाएगी और यह सत्यापन सीधे गृह मंत्रालय के माध्यम से होगा, जो AGMUT कैडर का कैडर नियंत्रक प्राधिकरण है।
सूत्रों के अनुसार हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें अधिकारियों को सेवानिवृत्ति लाभ जारी कर दिए गए, जबकि उनके खिलाफ अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मामलों की जानकारी पूरी तरह सामने नहीं आ सकी थी। चूंकि AGMUT कैडर के अधिकारी अपने करियर के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानांतरित होते रहते हैं, इसलिए कई बार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड अधूरा रह जाता था।
जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में संबंधित प्रशासनिक इकाइयों ने केवल अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध सतर्कता रिकॉर्ड के आधार पर पेंशन संबंधी मंजूरी दे दी। बाद में यह सामने आया कि अधिकारी के खिलाफ किसी अन्य AGMUT क्षेत्र में पहले से जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित थी, जिसकी जानकारी स्थानीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी। ऐसे मामलों ने केंद्रीय स्तर पर सत्यापन प्रणाली की आवश्यकता को और मजबूत किया।
अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में बिखरी सूचनाओं के कारण कई महत्वपूर्ण तथ्य सेवानिवृत्ति प्रक्रिया के दौरान नजरअंदाज हो जाते थे। कुछ भुगतान प्राधिकरणों ने बाद में यह तर्क भी दिया कि लंबित मामलों की जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसी वजह से मंत्रालय ने अब एक समान और केंद्रीकृत सत्यापन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक मामले में विजिलेंस सत्यापन अनिवार्य रूप से गृह मंत्रालय से प्राप्त किया जाएगा। जब तक मंत्रालय की ओर से औपचारिक क्लियरेंस जारी नहीं होती, तब तक किसी भी अधिकारी की पेंशन, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को मंजूरी नहीं दी जाएगी और न ही उनका भुगतान किया जाएगा। इससे लंबित मामलों की अनदेखी की संभावना कम होने की उम्मीद है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जवाबदेही बढ़ाने और सेवा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी अधिकारी के खिलाफ यदि कोई गंभीर सतर्कता जांच, अनुशासनात्मक कार्यवाही या आपराधिक मामला लंबित है, तो उसकी जानकारी सेवानिवृत्ति प्रक्रिया के दौरान संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष उपलब्ध रहे।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किए गए ये निर्देश प्रक्रियागत खामियों को दूर करने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे हैं। मंत्रालय को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के जरिए पेंशन मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और एकरूप बनेगी, जिससे भविष्य में विवादों और प्रक्रियागत चूकों की संभावना भी कम होगी।
