PIB ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से जुड़े वायरल AI-जनित वीडियो को फर्जी और भ्रामक बताया है।

AI और डीपफेक से आधार सिस्टम पर हमला: मोबाइल नंबर बदलकर लाखों की लोन ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब

Team The420
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अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में साइबर अपराध का एक बेहद हाईटेक और खतरनाक मामला सामने आया है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक तकनीक और आधार डेटा में कथित हेरफेर का इस्तेमाल कर लोगों के नाम पर ऑनलाइन लोन निकालने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने इस मामले में असम और उत्तर प्रदेश से तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह लोगों की जानकारी के बिना उनके आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर बदल देता था और फिर डिजिटल लोन लेकर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देता था।

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में असम का रहने वाला बी.कॉम छात्र रब्बुल हुसैन शामिल है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, वह डेटा चोरी और डिजिटल पहचान से जुड़ी तकनीकी गतिविधियों को संचालित करता था। उत्तर प्रदेश निवासी कृष्णा प्रजापति कथित तौर पर साइबर कैफे संचालक और एजेंट के रूप में काम कर रहा था, जो कमीशन लेकर आधार डिटेल्स में बदलाव कराने में मदद करता था। वहीं सातवीं पास काशीमुद्दीन अली पर आरोप है कि वह ठगी से हासिल रकम को अपने बैंक खातों में रिसीव करता था।

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साइबर क्राइम जांच के अनुसार, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी कथित तौर पर “Master India” जैसी वेबसाइट्स से GST और PAN कार्ड से जुड़ी जानकारियां हासिल करते थे। इसके बाद CIBIL स्कोर और अन्य वित्तीय विवरणों की जांच कर ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता था जिनके नाम पर आसानी से डिजिटल लोन लिया जा सके। पुलिस का कहना है कि आरोपी टेलीग्राम बॉट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मदद से पीड़ितों की आधार डिटेल्स और फोटो जुटाते थे।

इसके बाद AI तकनीक का इस्तेमाल कर कथित तौर पर “डीपफेक ब्लिंकिंग वीडियो” तैयार किए जाते थे। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ये वीडियो इतने वास्तविक दिखते थे कि ऑनलाइन वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी भ्रमित हो जाते थे। इसी तकनीक के जरिए आरोपी आधार से लिंक मोबाइल नंबर बदल देते थे। मोबाइल नंबर बदलने के बाद नया सिम कार्ड एक्टिव कर बैंक अकाउंट खोले जाते और फिर ₹25 हजार से ₹50 हजार तक के छोटे-छोटे डिजिटल लोन निकाले जाते थे।

यह पूरा नेटवर्क तब उजागर हुआ जब अहमदाबाद के एक व्यापारी को उनके आधार आधारित भुगतान सिस्टम से OTP मिलना बंद हो गया। जांच के दौरान पता चला कि बिना किसी OTP वेरिफिकेशन के उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डिटेल्स बदल दिए गए थे। बाद में उनके नाम पर ऑनलाइन लोन भी लिया गया। जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में लोकल आधार किट ऑपरेटर्स की भी भूमिका हो सकती है।

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार, गिरोह हर साल लगभग ₹10 से ₹15 लाख तक की लोन राशि विभिन्न फर्जी प्रक्रियाओं के जरिए हासिल करता था। अब तक इस मामले में कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि असम निवासी ओली उल्लाह नाम का एक आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में कई राज्यों में छापेमारी कर रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि:

“AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल अब केवल फर्जी वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर अपराधी इन्हें डिजिटल पहचान चोरी, बायोमेट्रिक फ्रॉड और वित्तीय ठगी के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अपराध और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।”

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला देश की डिजिटल पहचान और आधार आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम के लिए गंभीर चेतावनी है। जांच एजेंसियां अब आधार रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, मोबाइल सिम एक्टिवेशन डेटा और डिजिटल लॉग्स की विस्तृत जांच कर रही हैं। साथ ही संबंधित एजेंसियों को आधार सिस्टम में मौजूद संभावित सुरक्षा कमजोरियों के बारे में भी अलर्ट भेजा गया है।

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