Bengaluru में अपराध के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान के तहत सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने कई अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए राउडी-शूटर, लंबे समय से फरार अपराधी और फर्जी नौकरी रैकेट चलाने वाले पिता-पुत्री समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, 7 जून को CCB की ऑर्गनाइज्ड क्राइम विंग (ईस्ट) ने खुफिया जानकारी के आधार पर शहर के कई इलाकों में अचानक छापेमारी की। यह कार्रवाई उन 10 से अधिक राउडी-शूटरों पर केंद्रित थी, जिन पर अवैध हथियार इकट्ठा करने और आपराधिक गतिविधियों की योजना बनाने का संदेह था। इस दौरान दो आरोपियों पुणीत एस.वी. और शिवकुमार उर्फ ऑटो शिवा को गिरफ्तार किया गया। दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामले दर्ज थे। इन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वर्थुर पुलिस को सौंप दिया गया। छापेमारी में किसी भी प्रकार के हथियार बरामद नहीं हुए।
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इसी अभियान के दौरान एक अन्य बड़ी सफलता में शाहिद पाशा उर्फ डैकर शाहिद बिन लेट नोूर खान को गिरफ्तार किया गया, जो लंबे समय से फरार चल रहा था। आरोपी पर करीब आठ वर्षों से अदालत में पेश न होने और गिरफ्तारी से बचने का आरोप था। पुलिस ने सूचना के आधार पर उसे विनोबानगर इलाके से पकड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, उसके खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत द्वारा जारी वारंट और प्रोक्लेमेशन के बावजूद वह लगातार फरार था। उसे आगे की कार्रवाई के लिए के.जी. हॉलि पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है।
सबसे बड़ी कार्रवाई एक अलग मामले में सामने आई, जिसमें एक पिता और पुत्री को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों ने 40 से अधिक नौकरी अभ्यर्थियों से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर भारी रकम वसूली। पीड़ितों में अधिकतर उत्तर कर्नाटक के युवा शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने रेल, आयकर, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों में नौकरी दिलाने का दावा किया और फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए। इतना ही नहीं, उन्होंने बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में नकली ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किए, ताकि पीड़ितों को भरोसा दिलाया जा सके। कुछ महीनों तक स्टाइपेंड देकर उन्होंने लोगों का विश्वास भी जीत लिया, जिससे ठगी का नेटवर्क और मजबूत हुआ।
इस मामले की शिकायत 17 नवंबर 2025 को दर्ज की गई थी, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू हुई। दोनों आरोपियों को 4 जून को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब अन्य पीड़ितों की पहचान और ठगी गई रकम की रिकवरी में जुटी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य शहर में सक्रिय अपराध नेटवर्क को खत्म करना और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई राउडी तत्वों की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी, क्योंकि उनके दोबारा संगठित होने और हथियार जुटाने की आशंका थी। इसी आधार पर यह अचानक छापेमारी की गई।
जांच अधिकारियों ने यह भी बताया कि नौकरी फ्रॉड मामले में आरोपियों ने मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाए, जैसे नकली संस्थान, प्रशिक्षण प्रक्रिया और शुरुआती भुगतान, जिससे पीड़ितों का भरोसा बढ़ता गया।
फिलहाल सभी मामलों की जांच जारी है और पुलिस ने संकेत दिया है कि आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। CCB ने एक बार फिर लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति यदि सरकारी नौकरी के बदले पैसे मांगे या गारंटी का दावा करे, तो वह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
