नई दिल्ली। अमेरिका में काम कर रहे विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीय H-1B वीजा धारकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसमें H-1B वीजा प्रणाली के तहत मिलने वाली ग्रीन कार्ड सुविधा को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम से हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यह विधेयक रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने पेश किया है, जिसका नाम “अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट” रखा गया है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि पिछले कई दशकों से H-1B वीजा प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है और बड़ी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती कर अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार अवसरों को प्रभावित कर रही हैं।
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प्रस्ताव के अनुसार, यदि यह कानून लागू होता है तो H-1B वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का रास्ता लगभग समाप्त हो जाएगा। अभी तक इस वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवर बाद में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए आवेदन कर सकते थे, जिससे उन्हें अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का अवसर मिलता था।
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों में सबसे अधिक संख्या भारतीय नागरिकों की है। बड़ी संख्या में भारतीय युवा इस वीजा के माध्यम से अमेरिका में काम कर रहे हैं और भविष्य में स्थायी निवास की उम्मीद रखते हैं।
विधेयक में केवल ग्रीन कार्ड व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अन्य कई कड़े बदलाव भी प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें विदेशी छात्रों के लिए चलने वाले OPT (Optional Practical Training) कार्यक्रम को समाप्त करने का सुझाव भी शामिल है। यह कार्यक्रम छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमित समय तक अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उठाते हैं।
इसके अलावा, H-1B वीजा की अवधि को भी छह साल से घटाकर केवल दो साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मौजूदा लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर उन आवेदनों को प्राथमिकता दी जाए जिनमें अधिक वेतन वाली नौकरियां शामिल हों।
प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे उसे छोड़ने का इरादा रखते हैं। इसके अलावा लंबित ग्रीन कार्ड मामलों के आधार पर वीजा अवधि बढ़ाने की मौजूदा व्यवस्था को भी समाप्त करने की सिफारिश की गई है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज है और पहले से ही H-1B वीजा नियमों को कड़ा करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान प्रशासन द्वारा भी उच्च वेतन मानक और आवेदन शुल्क में वृद्धि जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो भारतीय आईटी सेक्टर, टेक कंपनियों और अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है। इससे न केवल नौकरी के अवसर प्रभावित होंगे बल्कि अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की उम्मीदें भी कमजोर पड़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव अमेरिकी आव्रजन नीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों के भविष्य पर दिखाई दे सकता है।
