पुणे में आईटी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹44 लाख की ठगी का मामला सामने आया, युवाओं को दिवालिया कंपनी में नियुक्ति देकर शिकार बनाने का आरोप

आईटी जॉब दिलाने के नाम पर ₹44 लाख की ठगी का खुलासा, दिवालिया कंपनी में नियुक्ति देकर युवाओं को बनाया शिकार

Team The420
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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले में आईटी क्षेत्र में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवाओं को प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों में रोजगार दिलाने का वादा कर उनसे लाखों रुपये वसूले गए और बाद में उन्हें एक आर्थिक रूप से संकटग्रस्त तथा कथित रूप से दिवालिया कंपनी में नियुक्त कर दिया गया। पूरे मामले में लगभग ₹44 लाख की ठगी का आरोप लगाया गया है, जिसके बाद पुलिस ने दो कंपनियों से जुड़े कई लोगों और उनके निदेशक मंडल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यह मामला पुणे के खराड़ी क्षेत्र से जुड़ा है, जो आईटी और कॉर्पोरेट गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। शिकायत के अनुसार नौकरी की तलाश कर रहे कई युवाओं को बेहतर करियर, आकर्षक वेतन पैकेज और प्रतिष्ठित कंपनियों में नियुक्ति का भरोसा दिलाया गया। इसके बदले उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक की रकम ली गई।

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जांच से जुड़े प्रारंभिक विवरणों के अनुसार आरोपितों ने सुनियोजित तरीके से नौकरी चाहने वालों को अपने जाल में फंसाया। उम्मीदवारों को विश्वास दिलाया गया कि उनके पास बड़ी आईटी कंपनियों में भर्ती कराने की विशेष व्यवस्था और संपर्क हैं। कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में अपनी बचत और उधार ली गई रकम तक आरोपितों को सौंप दी।

पीड़ितों का आरोप है कि धन लेने के बाद उन्हें एक ऐसी कंपनी में नियुक्त किया गया, जो पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही थी। नियुक्ति के शुरुआती चरण में कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन दिया गया, जिससे उन्हें लगा कि नौकरी वास्तविक है और सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा है। लेकिन इसके बाद वेतन भुगतान अचानक बंद हो गया और कंपनी की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी।

जैसे-जैसे कर्मचारियों को कंपनी की आर्थिक हालत और नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिली, उन्हें संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। कई प्रभावित युवाओं ने आपस में संपर्क किया तो कथित ठगी का दायरा सामने आया। जांच के अनुसार विभिन्न उम्मीदवारों से एकत्र की गई राशि को मिलाकर कुल कथित धोखाधड़ी लगभग ₹44 लाख तक पहुंच गई।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद प्रभावित युवाओं ने सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचाया।

सूत्रों के अनुसार बाद में वरिष्ठ स्तर पर हस्तक्षेप होने के बाद शिकायत की समीक्षा की गई और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों, प्रबंधकों और दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित भर्ती नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था और कितने लोग इसके शिकार बने। यह भी जांच की जा रही है कि उम्मीदवारों से ली गई रकम का उपयोग किस प्रकार किया गया तथा क्या इस कथित योजना में अन्य लोग या संस्थाएं भी शामिल थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार दिलाने के नाम पर अग्रिम धनराशि मांगने वाले मामलों में युवाओं को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। वैध कंपनियां सामान्यतः नियुक्ति प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों से भारी रकम नहीं मांगतीं। ऐसे मामलों में कंपनी की पृष्ठभूमि, वित्तीय स्थिति और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच करना आवश्यक माना जाता है।

पुलिस अब बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, भर्ती रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण से मामले की पूरी परतें सामने आ सकती हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ पीड़ितों की संख्या और कथित धोखाधड़ी की वास्तविक राशि में भी वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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